सुण स्याणी- सुण स्याणा, शोक सभा में स्टेटस मेंटेन 

shikhar chandra jain
सुण स्याणी ! आज आपणा कोम्प्लेक्स में ब्लोक बी में कोई फंक्शन है के? –सेठजी पूछ्या. सेठाणी बोली- नई तो…! आ बात कैयां पूछ्या? कोई कुछ बतायो के? सेठजी बोल्या – नई थोड़ी देर पैली एक केटरर बी ब्लोक में कोई को एड्रेस पूछ रियो हो. अब मैं बाजार स्यूं सब्जी-फल लेयर पाछो आयो जणा देख्यो क कॉफी बणाबा हाळी मशीन, क्रोकरी, मिनरल वाटर की बोतलां गाडी स्यूं उतर रही ही. ओर भी कई सामान आया है. सेठाणी दिमाग पर जोर देयर बोली- ओओओ..अरे बाबा फंक्शन कोनी..बी ब्लोक में जालानजी का पिताजी को शरीर शांत होग्यो हो ना…बाँकी बैठक शुरू हुई है आज स्यूं..आज दीतवार है भीड़ खूब होसी…थे भी बैठक में जा’र आज्यो. पण बैठक के वास्ते कैटरर क्यूँ आसी?? कालनै ओर कोई बात तो कोनी ना..?? एक बर थे सुराणा जी नै फोन करके कन्फर्म कर ल्यो.
सेठजी सुराणा जी ने फोन लगायो. सुराणा जी बोल्या –अरे हाँ हाँ! आज स्यूं बांके घर में आज स्यूं बैठक शुरू है. पण निहायत मक्खीचूस आदमी है. बाने बतायो जनगति कैटरर पण पीसा बचाण के लिए बुलायो है रुगलिया कैटरर ने. जनगति हालो इम्पोर्टेड क्रोकरी देतो, सर्विस में सुन्दर लेडीज अर जेंट्स देतो..पण छोड़ो आपां ने के पड़ी है. ठीक दो बजे आ जायो.
सेठजी सेठाणी ने बोल्या- सुराणा जी कन्फर्म कर दियो क शोक सभा आज स्यूं ई शुरू होसी. तू बी चालिए..कोम्प्लेक्स को काम है..
सेठ अर सेठाणी दोनूं बैठक में पूंचग्या. अभी आदमी ज्यादा कोनी हा. शोक सभा में कैटरिंग का आदमी ज्यादा घूमता नजर आ रिया हा. कोई मिनरल वाटर की बोतल लेके घुम रियो हो..कोई चाय..कोई कोफी…लोग दो-चार मिनट तो दिवंगत सुराणा जी के बारे में बातां करया पछै आपस में खुसुर-फुसुर चालू कर दिया.
सेठ-सेठाणी थोड़ी देर बैठकर पाछा घरां आग्या. सेठाणी बोली- देखो आपणा समाज की हालत. आपां तो सामान देखकर ताज्जुब कर रिया हा..पण लुगायां नै ऐ इंतजाम कम लाग रिया हा. एक लुगाई बोल री ही क शोकसभा कोई मिडिलक्लास का आदमी की जियां लाग री है…आजकल तो हल्काफुल्का स्नैक्स बी चाले है. कम स्यूं कम दो-तीन तरह का बिस्कुट अर नमकीन तो होणी चाए ही. बीकी बात सुणकर दूसरी लुगाई बोली कि अजी मैं तो काल ई एक बैठक में जा’र आई हूँ चांदी का गिलासाँ में पाणी दे रिया हा..अर जत्ता जणा गया बांने पचास-पचास रूपया का बामण-दक्षिणा का लिफाफा दिया है. सेठजी बोल्या –हाँ ! मने बी कोई खेमका जी बता रिया हा क आजकाल तो बैठक में गयोडा लोगां ने गीता, रामायण या कोई धार्मिक ग्रन्थ बी देणे को रिवाज है…आपका स्टेटस गैल बामण दक्षिणा को लिफाफों पचास स्यूं सौ रिपिया तक को होवै है. अर बीच में नमकीन काजू –बादाम भी घुमावे है. लोगां की भीड़ होवे है..इणकी बैठक तो कोई फैक्ट्री हाला की बैठक सी लागै ही कोनी..स्टेटस बिलकुल मेंटेन कोनी.
#शिखर चंद जैन

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।