“नारी तेरे रूप अनेक”

shivani gite
मैंने पूछा लोगों से नारी क्या है?
किसीने कहा माँ है,किसीने कहा बहन,
किसीने कहा हमसफ़र है,तो किसीने कहा दोस्त।
सबने तुझे अलग रूपों में बयां कर दिया।
अब मैं क्या तेरे बारे में कहूँ।
तू ममता की मुर्त है,
तू सच की सूरत है,
तू रोशनी की मशाल है जो अंधकार से ले जाती है परे।
तू गंगा की बहती धारा का वो वेग है जो पवित्र और निश्चल है।
तेरे रूप तो कई है,
तू अन्नपूर्णा है,तू माँ काली है।
तू ही दुर्गा,तू ही ब्राह्मणी है।
माँ यशोदा की तरह तूने कृष्ण को पाला,
गौरी बन शिव को संभाला ।
तू हर घर के आंगन की तुलसी है,
तू ही सबका मान है,तू ही अभिमान है,
नवरात्री में तू नौ रूपों में पूजी जाती है।
लेकिन तेरे नौ नहीं तेरे तो अनेक रूप है,
ऐ नारी तुझे नमन।

#शिवानी गीते

परिचय: लेखन में शिवानी गीते का उपनाम-वाणी है। इनकी जन्मतिथि-३ अगस्त १९९७ तथाजन्म स्थान-खरगोन(मध्यप्रदेश)हैl आप वर्तमान में इंदौर में निवासरत हैं। शिक्षा-बीए(पत्रकारिता एवं जनसंचार) है तो पेशा यानी कार्यक्षेत्र भी पत्रकारिता ही हैl लेखन के नाते ही समाज से जुड़ाव है। दैनिक अखबार में कविता प्रकाशित हुई है तो उपलब्धि यही है कि,प्रसिद्ध समाचार वेब पोर्टल पर लेख लगे हैं। इनके लेखन का उद्देश्य दूसरों तक अपने  विचार भेजना एवं समाज में हो रही गतिविधियों की आमजन को जानकारी देना है।

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