शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

0 0
Read Time1 Minute, 35 Second

बलिदान अपने शहीदों का व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
चीन कर ले तू जितनी तैयारी,तुझे धूल चटा देगे।।

लेंगे हर शहीद का बदला,तुझे जिंदा ही दफना देंगे।
अगर आंखे उठाई इधर तूने,तेरी आंखें निकाल देंगे।।

समझता क्या तू अपने को,तेरी हैकड़ी निकाल देंगे।
घिरा है तू चौदह देशों से,उनसे भी आक्रमण करा देंगे।।

करता है घमंड सस्ते माल पर,उसे भी बंद करा देंगे।
हर चीज भारत में बनेगी,भारत को आत्मनिर्भर बना देंगे।।

मत समझ बासठ का भारत,ये बीस का हिन्दुस्तान है।
इस मुल्क का हर बासिंदा ,तेरी मौत का अब निशान है।।

जब तक हर शहीद का बदला न लेले,तुझे चैन से बैठने न देंगे।।
तुझको अपनी एक इंच जमीं पर कब्जा नहीं होने देंगे।।

चीन कर के जितनी मक्कारी, तेरी हर मक्कारी निकाल देंगे।
हर शहीद का बदला लेकर,तेरी नाको तले चने चबा देंगे।।

चल रहे हैं जितने ऐप तेरे उन्हें भी विश्व से बन्द कर देंगे।
तेरे सोशल मीडिया को भी उल्टे सिर के बल लटका देगे।।

इन शब्दों के माध्यम से ही तेरा सीना छलनी कर देंगे।
तेरे हर हथियार को अब हम चलनी कर देंगे।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

Next Post

जयहिंद

Thu Jun 18 , 2020
धरती मां की रक्षा को जवान सीमा पर डटे है प्राणों की बाजी लगाकर तिरंगे की रक्षा को खड़े है दुश्मन चीन घुसने न पाए जान भले ही हमारी जाए भाषण नही अब निर्णय हो शहादत का भी बदला लो एक इंच भी ज़मीन न देंगे तिरंगे को झुकने न […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।