घर छोड़ आया हुं,,

sachin

जिम्मेदारीं की गठरी ले,मैं दोड़ आया हुं,,
ऐ नोकरी मैं घर छोड़ आया हुं,,
बचपन के वो खेल खिलोने, रेत से बनते घर के घरौंदे,,
वो बारिश़ का पानी जो काग़ज की कश्ती डूबोदे,,
उन सारी यादों से मैं मुहं मोड आया हुं,,
ऐ नोकरी मैं घर छोड़ आया हुं,,
वो गांव की गलीयां, वो यारों की टोली,,
वो अल्हड़पन की मस्ती, वो भाभी संग हंसी ठिठोली,,
उन किस्सो को ,उन हिस्सो को पिछे छोड़ आया हुं,,
ऐ नोकरी मैं घर छोड़ आया हुं,
वो मां के हाथ की रोटी, वो पिता के कांधे का झूला,,
वो भाई से तकरारे, बहना के नख़रो को भूला,
वो कुटुंब, कबीला सब सारा मैं छोड़ आया हुं,
ऐ नोकरी मैं घर छोड़ आया हुं,
वो किसी की आखों पे मरना, वो किसी की यादों में रमना,,
वो किसी के इश्क़ की खुशबू से स्वंय को आन्नदित करना,,
उन कसमों को उन वादो को मैं तोड़ आया हुं,,
ऐ नोकरी मैं घर छोड़ आया हुं ।
सचिन राणा हीरो
     हरिद्वार उत्तराखण्ड।

matruadmin

Next Post

अच्छापन

Wed Sep 19 , 2018
हर दिन को अच्छा मान करते रहो अच्छे काम कोई भी दिन बुरा नही संकल्प बुरा है बेकार अच्छा सोचो अच्छा बोलो अच्छा ही बन जाओगे स्वस्थ्य मन बुद्धि होगी सबके प्यारे हो जाओगे अच्छेपन से आगे बढ़कर जीवन लक्ष्य पा जाओगे। #गोपाल नारसन परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।