*हिंदी की स्थिति*

swarakshi
समय के साथ-साथ जैसे परिवार के मुखिया का स्वरूप बदलता रहता है, ठीक उसी प्रकार से आज हिंदी का स्वरूप भी बदला हुआ है । हिंदी आज के परिवेश में बुजुर्गियत की सीमा रेखा को पार करने के कगार पर है । शायद इसलिए हमने हिंदी को कुर्सी पर बिठा घर के एक कोने में डाल रखा है ।
ऐसा नहीं है कि हम अनदेखा कर रहे  हैं ।
नहीं-नहीं बिल्कुल भी नहीं समय-समय पर उसे देखते रहते हैं । जब भी वह बेहोश होने लगती है हम ,,,,, *हिंदी हमारी मातृभाषा है, हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान “* जैसे नारों के छींटे उसके मुंह पर मार उसे होश में ले आते हैं ।
हम पूर्ण रूप से उसे मृत भी नहीं होने दे सकते ,ठीक वैसे ही जैसे पेंशनधारी बुजुर्गों को जबरदस्ती कुछ और अधिक सालों तक जीवित रखने का निर्मूल प्रयास करते हैं । आखिर कब तक हम यूं हिंदी को घसीटते रहेंगे ,अपमानित करते रहेंगे।
हम ऐसे भारतीय हैं जिन्हें  हिंदुस्तानी होने पर तो गर्व महसूस  होता , परंतु हिंदी बोलने पर शर्म आती है । जब तक हमें हिंदी बोलने पर गर्व अनुभव नहीं होगा हिंदी अपनी तरुणाई को नहीं पा सकेगी । कुछ एक रोज हिंदी प्रेम का नारा देने से ,हिंदी दिवस मना लेने से ही हिंदी के प्रति हमारे  कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाते। जरूरत है हमें रोज ही उसकी देखभाल करने की ,उसे दुलारने की, खुद में आत्मसात करने की तभी हम उसे वह अधिकार ,वह सम्मान दे पाएंगे जिसकी वह हकदार है ।
        
*स्वराक्षी स्वरा*
*खगड़िया बिहार*

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।