*रक्षाबंधन*

babulal sharma
1.🌼
पून्यू  भादौ मास में, राखी को त्यवहार।
भाई को रक्षा बचन,बहना को अतबार।।
2.🌼
बिषनू पत्नी लिच्छमी ,कहि नारदमुनि साय।
बलि को राखी भेजकर,बिष्नु को संग लाय।।
3.🌼
रीत  सनातन सूँ चली, भाइ- बहन रो प्यार।
सांसारिक की रीत छै, परिवारिक व्यवहार।।
4.🌼
सरवण  पूजन भी हुवै, राखी रै त्यवहार।
दरवाजै  दोनी तरफ ,सरवन  री मनवार।।
5.🌼
कर्मवती  मेवाड़ की, भेजी    राखी  डोर।
लाज हुमायू नहि रखी, बनती बाताँ और।।
6.🌼
दिवस संस्कृत भी मनै,राखी कै दिन वार।
पावन  भादौ  लागतै , त्यवहारी  मनवार।।
7.🌼
खेताँ मैं मक्का हँसे, घर मैं सग परिवार।
पावस रुत मैं मौज छै, राखी कै त्यवहार।।
8.🌼
बहन कहै युँ भाई नै, सुण बीरा तू बात।
पहली राखी फौज की,दूजै पेड़ बँधात।।
9.🌼
फिर थारै  राखी  बँधै , टप्पा ढाई  बात।
नवयुग मैं नवरीत छै,प्राकृत देश सँगात।।
10.🌼
कृषक और मजदूर कूँ ,राखी की सौगात।
पकवानों की मौज हो, राखी संगति बात।।
11.
राखी बांधू  देश री, भारत माँ रै चित्र।
उणनै भी मै भेज दूँ ,जे भारत रा मित्र।।
12.
राखी गंगा यमुन की,सागर गगन चढाय।
चन्द सूर अपनी धरा, प्राकृत बांधू  गाय।।
13.
राखी जननी मात की,भैण भुवा संग भात।
रीत  प्रीत   री  डोर  है , सनातनी  सौगात।।
14,
पशुधन,और किसान कूँ, कैदी दीन बीमार।
बटुक संत फकीर सब, राखी पर सतकार।।
15.
मानवता हित देश रै ,जे कूँ साँची  प्रीत।
राखी  बांध बणाइलूँ , मैं तो साँचो मीत।।
16.
राखी बंधण प्रीत रो ,छै साँचो  परतीक।
राखी तो राखी भली, न राखी तो ठीक।।
17.
देश और  परदेश  मैं,  हिन्दवाणि रीवाज।
सब जग राखी भेज दूँ, प्रीत रीत परवाज।।
18.
सुणो,सभी या अरज कूँ,भारत का नर नार।
देश  रुखाल़ी  कारणै ,  बंधण  सूतर  धार।।
19.
सरजीवी निरजीव सग,मानव रै हित लाग।
राखी रा हकदार  छै, आन मान अरु  पाग।।
20.
नित रोजन त्यवहार छै,नित ही मंगलाचार।
प्रीत  प्रेम  परतीत रो, राखी  छै  ब्यवहार।।
21.
राखी री बाताँ घणी,कही,सुणी कर माफ।
शरमा बाबू लाल रा, हिवड़ो  भाँया साफ।।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।