(माननीय अटल जी को शब्दांजलि)
अनन्त यात्रा पर हो अटल मैं निकला ।
विदा हो प्रियजन से
देश धरती और गगन से ।
न भूल सकूँ , न तुम भुला देना
यह जीवन पथ तो है बस देना लेना ।
कुछ शब्द दिए
और प्यार ले लिया ।
साथ यही बस लेकर चला ।
लो जाते जाते अब सूरज ढला ।
मिला जो अवसर फिर आऊंगा ।
भारत में ही जन्म पाउँगा ।
यह सत्य अटल
बस चोला बदल
फिर से अलख जगाऊंगा ।
हाँ मैं आऊंगा ।
हाँ मैं आऊंगा ।
#दुर्गेश कुमार
परिचय: दुर्गेश कुमार मेघवाल का निवास राजस्थान के बूंदी शहर में है।आपकी जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी है। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा ली है और कार्यक्षेत्र भी शिक्षा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। विधा-काव्य है और इसके ज़रिए सोशल मीडिया पर बने हुए हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी की सेवा ,मन की सन्तुष्टि ,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है।
Fri Aug 17 , 2018
जयजयजयजयअटलबिहारी । राजनीति भी तुमसे हारी।। पच्चीस दिस सनचौबिसआई। अटल बिहारी जन्में भाई।। कृष्ण बिहारी पिता तुम्हारे। जो शिक्षक थे सबसे न्यारे।। कविता साहित्य खूब रचाये। दीन दुखिन को लगे लगाये।। भाषण व्यंग्य कविता गाई। हिन्दी भाषा मुकुट बनाई।। राष्ट्रसंघ में भाषण दीना। सारे जग ने हिन्दी चीह्ना।। सन सत्तावन […]