गुलामी की वो आखरी रात

khushabu kumari
आज की ये रात , है भारत के लिए खास ,
1947 को इसी दिन , हो रहा था स्वतंत्रता का आगाज़ ,
नीव रखी जा रही थी ,
सालों की तपस्या की , तस्वीर रची जा रही थी ,
जब पूरा विश्व , अँधेरे में सो रहा था ,
भारत मे आज़ादी की रोशनी सजी जा रही थी ,
मुकम्मल होने वाली थी वो ख्वाहिश ,
1600 से 1947 तक के संघर्ष की फरमाइश ,
लम्बे समय से गुलाम भारत , आज़ाद होने वाला था ,
गुलामी के हर पन्नो का , इतिहास बनने वाला था ,
12 बजने का इंतज़ार है हमे ,
कुछ और घण्टो का , एहसास है हमे ,
हर आँखों मे बस एक ही इंतज़ार था ,
गुलामी का वो आखरी एहसास था ,
रात बड़ी लंबी गुजर रही थी ,
क्योंकि वो रात , गुलामी की आखरी रात थी ।
गुलामी की आखरी रात थी।”
गुलामी के इस रात में जब स्वतंत्रता के बीज बोए जा रहे थे ,
उस सूरज को भी इंतजार था ,
भारत मे स्वतंत्रता का , दीपक जो जलाना था ,
गुलामी की वो आखरी रात थी ,
गुलामी की वो आखरी एहसास थी ।।।
#खुशबू कुमारी

matruadmin

Next Post

एक सैनिक की पत्नी का संदेशा

Tue Aug 14 , 2018
ऐ सावन की घटा जा सीमा पे ज़रा एक  संदेशा उन तक पहुंचा देना । कई दिनों से नहीं लौट के आए वो, घर के हाल जरा उन्हें बतला देना। बहना  सजा  रही  है थाल फिर से, सुनी  कलाई  का  मान बढ़ा देना । बह ना जाए नीर उसकी आंखों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।