
माया माया में फँसीं,
पप्पू में अखिलेश..
मोदी काशी में फँसे,
देख रहा है देश।
देख रहा है देश,
‘गधों’पर मस्ती छाए..
डिम्पल भउजी देख,
कबीरा ललुवा गाए।
कह सुरेश ‘वोटर’ को,
हर कोई भरमाया..
बाभन तज मुस्लिम का,
हाथ पकड़ ली माया।
#सुरेश मिश्र
परिचय : सुरेश मिश्र मुम्बई में रहते हैं। आप वर्तमान में हास्य कवि के रुप में कई मंचों से काव्य पाठ करने के अनुभवी हैं। कवि सम्मेलनों में मंच संचालन भी करते हैं।

