पानी    

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suresh sourabh

टोटी से पानी बह रहा है , उसके सामने बैठी एक महिला तसल्ली से स्वेटर बुन रही है । उसके सामने से एक आदमी निकला । महिला के दरवाजे पर बहते पानी को देखते हुए चला गया। लगभग एक घंटे बाद उधर से फिर निकला टोटी से फालतू पानी अब भी बह रहा था। यह देख , उसे गुस्सा आ गया, पर सारी गुस्सा को पीकर हाथ जोड़कर  महिला से बोला-बहन जी एक घंटे से फालतू में पानी बह रहा है कम से कम टोटी बंद ही कर दो।
‘हुंह कौन पैसा लग रहा है, पर कुछ लोगो की टोकने आदत होती है। महिला तुनक कर बोली।
“बहन जी पानी बचाएं धरती पर पीने लायक पानी बहुत कम है।”
“अपना रास्ता देखो खामखा क्यों लटी-पटी सुनना चाहते हो। महिला की त्योरियॉ चढ़ते देख वह आदमी नाक भौ सिकोड़ते हुए भुनभुनाते हुए चला-‘पड़ गई तुम औरत वर्ना थ्रो बाल की तरह उड़ा देता।’

 #सुरेश सौरभ
    लखीमपुर खीरी

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।