चेतावनी

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दरोगा अभय यादव की शैतानियत से बच्चा-बच्चा परिचित था । रिश्वत खाने की उसे ऐसी बीमारी थी कि आदमी कितना भी गरीब हो उससे उसे पैसा चाहिए ही चाहिए ।

रात को एक मामला थाने में आया । झगड़ा पारिवारिक था, फिर भी रफा-दफा करने के बजाय अभय यादव ने उसे उलझा दिया । पूरे दो घंटे थर्ड डिग्री दी और बीस हजार में अभय यादव ने अपने कंधों के सितारों का सौदा उस गरीब से कर दिया ।

उस गरीब ने पैसे जुटाने की भरपूर कोशिश की पर किसी ने उसे फूटी कौड़ी न दी । मजबूरन उसे अपनी दूध देती भैंस बूचड़ खाने वालों को बेचनी पड़ी । बीस हजार लेकर अभय यादव निकला मौज-मस्ती के लिए । मुफ्त के पैसों की बहुत गर्मी होती है । हवा खाने के लिए अभय यादव ने अपनी बुलैट वाइक की गति और तीव्र कर दी, तभी पता नहीं कहां से विदेशी नस्ल का काला सांड आकर बीच सड़क पर प्रकट हो गया । अभय यादव कुछ सोचते- समझते तब तक वे हवा में उड़ गये…।

पूरी रात बेहोश रहे, सुबह होश आया तो हॉस्पिटल के बेड पर पड़े थे । दांत गायब, पैरों की हड्डियों का चूर्ण बन गया, बायां हाथ धनुष बन गया । बस न जाने कैसे पाप के तालाब में पुण्य का एक छोटा सा कमल खिल गया कि जान बच गई । या यूं कहें कि ईश्वर की चेतावनी थी कि बेटा सुधर जा, ये वर्दी, ये पॉवर सदा न रहेंगे, कर्म सुधार ले ।

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
फतेहाबाद, आगरा

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खो देते है…

Tue May 18 , 2021
मत पिलाओं अपने आँखों से इतना की हम उठा न सके। मत दिखाओ अपने हुस्न को कि हम नजर हटा न सके। जब भी होते है दीदार तुम्हारे खो देते है अपना सुध्दबुध। और तुम्हें ही अपनी नजरो से देखते रहते है।। खोलकर उलझे हुए कालेबालों को जब तुम सुलझती […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।