क्या नहीं,कैसे…

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aashutosh

हमारे जन्म के साथ ही संसारभर के वे सारे लोग जो हमसे पहले इस दुनिया में जन्म ले चुके होते हैं,हमें सिखाते हैं कि हमें क्या बोलना चाहिए,हमें क्या पढ़ना चाहिए,हमें क्या लिखना चाहिए।
हम ये सीख भी लेते हैं-और क्या बोलना,क्या पढ़ना,क्या लिखना हमारे लिए कल्याणकारी है,इसे जैसा का तैसा दोहराकर स्वयं के शिक्षित,संस्कारी,सदाचारी,सहृदय होने का प्रमाण भी देते हैं,किंतु इसके बाद भी हमें संसार से अपेक्षित आदर,प्रेम,सदशयता प्राप्त नहीं होती। परिणामस्वरूप हमारा विश्वास कल्याणकारी ‘क्या’ से उठ जाता है,तब हम खिन्नता से भरकर वह बोलने,लिखने,पढ़ने लगते हैं जिसकी वर्जना होती है।
अंततः हम सदुद्देश्य से भरे होने के बाद भी असंतुष्ट और दुखी जीवन को प्राप्त होते हैं। इसका कारण मात्र इतना है कि,‘क्या’ को सिद्ध करने के प्रयास में हम ‘कैसे’ की तरफ़ ध्यान नहीं देते। स्मरण रखने योग्य यह है कि,जितना महत्व ‘क्या’ होता है,उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण ‘कैसे’ होता है। इसलिए क्या बोलना है,सीखने के साथ हमें यह भी सीखना अत्यंत आवश्यक होता है कि-‘कैसे बोलना है’ ?
`क्या लिखना है` से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है `कैसे लिखना` ?
`क्या पढ़ना है` से अधिक कारगर होता `कैसे पढ़ना` ?
‘क्या’ के साथ ‘कैसे’ को साधते ही हमारा जीवन संतोष और सुख का आगाज हो जाता है।
शुभम भवतुl
`मैं कड़वा बोलता हूँ,तो मेरी शक्कर नहीं बिकती।
वो मीठा बोलकर कच्ची निम्बोली बेच देता हैll`

             #आशुतोष राणा
परिचय: भारतीय फिल्म अभिनेता के रूप में आशुतोष राणा आज लोकप्रिय चेहरा हैं।आप हिन्दी फिल्मों के अलावा तमिल,तेलुगु,मराठी,दक्षिण भारतऔर कन्नड़ की फिल्मों में भीसक्रिय हैं। आशुतोष राणा का जन्म १० नवम्बर १९६७ को नरसिंहपुर के गाडरवारा यानी मध्यप्रदेश में हुआ था। अपनी शुरुआती पढ़ाई यहीं से की है,तत्पश्चात डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से भी शिक्षा ली हैl वह अपनेमहाविद्यालय के दिनों में हीरामलीला में रावण का किरदार निभाया करते थे। प्रसिद्धअभिनेत्री रेणुका शाहने से विवाह करने वाले श्री राणा ने अपनेफ़िल्मी सफ़र की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी। आपने प्रस्तोता के रूप में छोटे पर्दे पर काफीप्रसिद्धी वाला काम किया। हिन्दीसिनेमा में आपने साल १९९५ मेंप्रवेश किया था। इन्हें सिनेमा में पहचान काजोल अभिनीत फिल्म`दुश्मन` से मिली। इस फिल्म में राणा ने मानसिक रूप से पागल हत्यारे की भूमिका अदा की थी।आध्यात्मिक भावना के प्रबल पक्षधर श्री राणा की ख़ास बात यह है कि,दक्षिण की फिल्मों में भी अभिनय करने के कारण यहदक्षिण में `जीवा` नाम से विख्यात हैं। `संघर्ष` फिल्म में भी आपके अभिनय को काफी लोकप्रियता मिली थीl लेखन आपका एक अलग ही शौक है,और कई विषयों पर कलम चलाते रहते हैंl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।