वो नन्हा सा स्पर्श
जब पनपा मेरी कोख में …
इक आलौकिक सी
अनुभूतियों का एहसास
इक प्यारा सा
जब अंकुर फूटा
मेरी देह में …
..वो नन्हा सा स्पर्श
जब पनपा मेरी कोख में ..
सुनो कह नहीं पाएंगे
कुछ एहसास लफ़्जों में
पिरोए नहीं जाएंगे …
जो अंतस को छू जाए ..
ऐसे शब्द मिल नहीं पाएँगे …
दिया है सिर्फ़ औरत को ..
माँ बनने का गरूर ..
वो सहनशीलता ..
वो अथाह पीड़ा सहने का सरूर
माँ शब्द सुखद अनुभूति .
जब नन्हा स्पर्श आया मेरी गोद में ..
इससे प्यारा इससे न्यारा
जग में नहीं हो सकता कोई ओर
चुका ना सका ख़ुदा भी ..
माँ की अथाह पीड़ाओं का मोल ..
भूल गई हर दुःख हर दर्द
जन्म देने की वो असहनीय पीड़ा ..
जब छुआ उसे ओर
लगाया मैंने सीने से ..
आलौकिक सी
अनुभूतियों का एहसास
वो नन्हा सा स्पर्श
नन्हा सा अंकुर जब
फूटा मेरी कोख में ..
#डेज़ी जूनेजा
नाम………डेज़ी जूनेजा
पता…….मोहाली (चंडीगढ़ )
सम्मान…काव्य दंगल साहित्य प्रतियोगिता सम्मान पत्र
( 2) काव्य सागर सम्मान ॥
प्रकाशन___*गूलनार ओर मृगनयनी* सांझा काव्य संग्रह
सत्यम प्रकाशन ओर ऋषि ज़ी क़े नेतृत्व में
*एक मुलाक़ात* (प्रकाशाधिन ) प्रीति सूराना ज़ी क़े नेतृत्व में ..
Tue Jul 17 , 2018
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