बेटियां, हमारा अभिमान

punam katariyar
कोमल -चंचल बाला जब
 फौलाद हो जाती हैं ,
सहमी -सकुचाई आंखों में,
 ‘निश्चय’ उभर जाता है।
‘अबला’  कहने वालों को
 वह ‘देवी’ लगने लगती है
भारत -माता का आंचल जब
 तमगों से वह भर  देती  हैं।
अजेय हिमालय का शीश,
‘हिमा’मय   हो  जाता  है,
हर्ष -विह्वल अधरो पर उसके
जब,’जन -गण’ मचल जाता है ।
स्वर्ण-रजत -कांस्य उपलब्धियां,
 गले  का  हार बन  जाती  हैं,
सवा- सौ करोड़  दिलों पर तब,
 एक  गुरुर -सा  छा  जाता  है।
‘बेटियां,   हमारा   अभिमान’
आन बान- शान  बन  जाती  हैं,
बुलंदियां उन कदमों को चूमती हैं,
पूरा हिंदुस्तान झूम -झूम जाता है।
#पूनम( कतरियार)
नाम-   पूनम (कतरियार)
जन्म-स्थान :हजारीबाग(झारखंड)
शिक्षा–   एम.ए.(हिन्दी साहित्य)
संप्रति  –  लेखन
पता   –   पटना(बिहार)

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