महक उठी है कहीं फिरसे रातरानी…..

bharat malhotra

महक उठी है कहीं फिरसे रातरानी क्या
लौट आई दोबारा मेरी ज़िंदगानी क्या
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देख के ताजमहल ये सवाल उठा दिल में
गरीब के इश्क की भी है कोई निशानी क्या
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लुटा तो दी रंगीनियों का मज़ा लेने में
थी इसी काम के लिए तेरी जवानी क्या
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वो जैसे चाहे मुझे इस्तेमाल करता है
मेरी मंजूरी क्या और मेरी आनाकानी क्या
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दिल थर्राया, ज़मीं हिल गई अचानक से
किसी मासूम आँख से गिरा है पानी क्या
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इश्क करके क्यों एहसान जताता है मुझे
कर रहा है मुझपे कोई मेहरबानी क्या
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भरत मल्होत्रा।
 
परिचय :- 
नाम- भरत मल्होत्रा 
मुंबई(महाराष्ट्र)
 
शैक्षणिक योग्यता – स्नातक 
वर्तमान व्यवसाय – व्यवसायी 
साहित्यिक उपलब्धियां – देश व विदेश(कनाडा) के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों , व पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
सम्मान – ग्वालियर साहित्य कला परिषद् द्वारा “दीपशिखा सम्मान”, “शब्द कलश सम्मान”, “काव्य साहित्य सरताज”, “संपादक शिरोमणि”  
झांसी से प्रकाशित “जय विजय” पत्रिका द्वारा ” उत्कृष्ट साहितय सेवा रचनाकार” सम्मान एव 
दिल्ली के भाषा सहोदरी द्वारा सम्मानित, दिल्ली के कवि हम-तुम टीम द्वारा ” शब्द अनुराग सम्मान” व ” शब्द गंगा सम्मान” द्वारा सम्मानित  
प्रकाशित पुस्तकें- सहोदरी सोपान 
                         दीपशिखा 
                         शब्दकलश 
                         शब्द अनुराग 
                         शब्द गंगा 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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