निरपेक्ष राष्ट्र प्रेम

prashant kourav
ज्ञान की देवी सरस्वती पूजता हूँ तुम्हें,
बुद्धि और विवेक के भंडार भर दीजिए।
व्यर्थ शब्दों का अवशेष फैल रहा चहुंओर,
शुद्धता बना दो दूर सब विकार कर दीजिए।
प्रेम-प्यार वाली बोली सब बोलने लगें तो,
द्वेष वाली भावना का उदगार कर दीजिए।
चाहता हूँ लेखनी राष्ट्र हित में ही चलती रहे,
मुझे दे के वरदान ऐसा उपकार कर दीजिए।
की मैया शेरा वालिए दुर्गा महा कालिए,
दुखियों के दुखों का उद्धार कर दीजिए।
दर पे में आया तेरे,दुखों को मिटाओ मेरे,
सब समस्याओं का संहार कर दीजिए।
लिखने की शक्ति दो,बोलने की शक्ति दो,
कलम की मेरी तेज धार कर दीजिए।
लेखनी चिराग है, हर छंद मेरा आग है,
पूर्ण शब्दों में मेरे अंगार भर दीजिए।
आज नहीं-कल नहीं,परसों नहीं मित्र मेरे,
देश को आज एक यंत्र अब चाहिए।
जन गण मन हो या सुजलांम सुफलांम,
चहुंओर देश को ऐसा मंत्र अब चाहिए।
तो देश भक्ति के तराने लिखता रहूंगा मैं,
कलम को मेरी लोकतंत्र अब चाहिए।
लाज शर्म छोड़कर,लिखूं शब्द जोड़कर,
सदा के लिए देश स्वतंत्र अब चाहिए।
बार-बार वंदना,करे ये गौरी पुत्र नंदना,
दीन-हीन व्यक्तियों के दुखों को उबार दो।
जो मिटा रहे सत्य को बहा रहे रक्त को,
आकर आप इन्हें अपने फरसे से फाड़ दो।
देशद्रोहियों के अंश को,पापियों के वंश को,
आकर के आप अब जड़ से उखाड़ दो।
और लुटेरों के वंश कर दीजिएगा निर्वंश,
पकड़ दोनों हाथ उनके जबड़ों  को फाड़ दो॥
                                                 #प्रशांत कौरव ‘मजबूर’
परिचय: प्रशांत कौरव ‘मजबूर’ की जन्मतिथि-१७ अक्टूबर १९९२ और जन्म स्थान-आडेगाँव(खुर्द,गाडरवाड़ा जिला नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश) है। मप्र के इसी शहर-गाडरवाड़ा में आपका निवास है। उच्चतर शिक्षा के बाद आपका कार्यक्षेत्र-कृषि का निजी व्यवसाय है। आप सामाजिक क्षेत्र में कौरव महासभा नरसिंहपुर में सक्रिय हैं। लेखन विधा-वीर रस अपनाई हुई है तो करीब २५० अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में मंच से भी कविताएं सुना चुके हैं। सम्मान के रुप में नवोदित रचनाकार सम्मान,भीष्म साहित्य सम्मान,वाग्दत्ता साहित्य सम्मान, सरस्वती साहित्य परिषद युवा रचनाकार सम्मान काव्य कलश समान २०१७ भी आपको दिया गया है। आपके लेखन का उद्देश्य यही है कि,अपनी कविताओं के माध्यम से सब लोगों को हर बार एक आजाद हिन्दुस्तान का संदेश और आतंकवादियों,भ्रष्टाचारियों तथा देशद्रोहियों से हमेशा लड़ने का प्रोत्साहन देते रहें।

matruadmin

Next Post

कड़वा सच

Sat Oct 14 , 2017
rla sinh कई बार लोग सीरत से अधिक सूरत को महत्व देते हैं,व्यक्तित्व को विशेष रूप से महत्व देते हैं। अगर किसी के पास दोनों न हो तो,उसे धनाढ्य होना चाहिए, अन्यथा लोग इज्ज़त नहीं करते हैं।     ‘अरे लो ये पेपर,इस पर स्टैम्प….अरे ठप्पा लगा लो,ठप्पा-ठप्पा।’ प्रधानाचार्या जी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।