किसानों को एतिहासिक राहत

vaidik
देश के करोड़ों किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने अनाज की 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए हैं अर्थात सरकार उन अनाजों को अपने घोषित दामों पर खरीद लेगी ताकि किसानों को घाटा न हो। सरकार की घोषणा के मुताबिक किसान को उसकी उपज की लागत से डेढ़ गुना मूल्य सरकार देगी। उन्हें डेढ़ गुना मूल्य मिले, ऐसी सलाह स्वामीनाथन आयोग ने दी थी लेकिन यहां एक पेंच है। उस आयोग ने फसल का लागत मूल्य तय करने में किसान की ज़मीन का किराया भी जोड़ा था याने फसल उगाने में आप खुदाई, बीज, सिंचाई, खाद, दवा, बिजली, मजदूरी आदि का खर्च तो जोड़ रहे हैं लेकिन जिस जमीन पर यह सब होना है, उसका खर्च कैसे छोड़ सकते हैं ? यदि जमीन का खर्च भी सरकार जोड़ लेती तो उसका अभी जो डेढ़ गुना दाम है, वह पौने दो गुना या दोगुना हो जाता। इसी तर्क के आधार पर कांग्रेस आदि पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार का यह डेढ़ गुना समर्थन मूल्य एक ढकोसला है। कारखानों में बनी चीजों का लागत मूल्य निर्धारित करते समय कारखाने की जमीन का खर्च क्या हम नहीं जोड़ते हैं ? इस दृष्टि से किसानों को अतिरिक्त लाभ दिया जा सकता है लेकिन इस समय की गई इस घोषणा से भी किसानों को काफी राहत मिलेगी। धान, ज्वार और मक्का जैसे अनाजों की लागत का डेढ़ा मूल्य किसानों को मिलेगा ही लेकिन बाजरे पर 97 प्रतिशत, उड़द पर 62 प्रतिशत और अरहर पर उन्हें 65 प्रतिशत फायदा मिलेगा। इस बढ़ोतरी से सरकार पर 15 हजार करोड़ रु. का नया बोझ पड़ेगा। करोड़ों किसानों पर 15 हजार करोड़ के खर्च और दर्जनभर धन्नासेठों पर लाखों करोड़ रु. डुबो देने में कोई फर्क है या नहीं ? किसानों को दी गई यह राहत सराहनीय है लेकिन यदि उनकी उपज के दाम बाजार में 10 से 50 प्रतिशत तक गिर गए, जैसा कि होता ही रहता है तो सरकार क्या करेगी ? क्या वह उनकी सारी फसलें खरीद सकेगी ? सरकार के पास ऐसा कोई इंतजाम नहीं है। सरकारी खरीद धान और गेहूं तक सीमित है। आलू, प्याज और टमाटर इस साल कौड़ियों के मोल बिकते दिखे हैं। किसानों को उनकी उपज का डेढ़ गुना दाम वाकई मिल जाए तो यह एक एतिहासिक घटना होगी। जो भी हो, देश के करोड़ों किसानों को इस घोषणा से थोड़ा-बहुत लाभ तो मिलेगा ही मिलेगा।
                     #डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।