तुम नहीं हो साथ तो, उपहार लेकर क्या करुं। रेशमी परितृप्तियों का हार लेकर क्या करुं।। प्रेम का दीपक जलाए जल रहा हूँ रात-दिन। बंधनों के रूप में अधिकार लेकर क्या करुं।। प्रेमरुपी लालिमा भरकर किसी की माँग में। मैं अमर-सौभाग्य का आधार लेकर क्या करुं।। शूल बनकर फूल भी […]
