निश्छल,निष्पाप,प्यार से बंधी है, मेरी माँ रिश्तों से नहीं,दिल से बनी है। गलतियां वो हमारी हमें ऐसे बताती है, जहाँ दिलों में हमारे अपने प्यार को बढ़ाती है। हर बंधन,हर रिश्ता उसे एक-सा लगता है, दुश्मन भी अपना उसे दोस्त-सा लगता है। अथाह सागर है प्यार का उसके पास, हर […]
