राष्ट्रीय पर्यटन दिवस

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कर लो कर लो,
भारत की सैर भैया।
मिल जाएंगे ,
खुशियों के ढेर भैया।
कर लो कर लो……

चाहे जानों इतिहास,
चाहे जानों भूगोल।
चाहे जानों धरती है,
गोल भैया ।
कर लो कर लो…….

चाहे देखो रंग रूप,
चाहे देखो पोशाकें।
चाहे सुन लो,
अनेकों बोल भैया।
कर लो कर लो…..

चाहे देखो पर्वत,
चाहे देखो नदियाँ।
प्रकृति का ना है,
कोई तोल भैया।
कर लो कर लो……

चाहे चख लो पेठा,
चाहे चख लो इडली।
चाहे चख लो हज़ारों,
भोज भैया।
कर लो कर लो…….

चाहे जानों होली,
चाहे जानों ओणम।
चाहे जानों हज़ारों,
त्योहार भैया।
कर लो कर लो…..

चाहे कर लो पूजा,
चाहे कर लो ध्यान।
चाहे करो गरीबों को,
दान भैया।
कर लो कर लो……..

चाहे जाओ मन्दिर ,
चाहे जाओ मस्जिद।
चाहे तुम जाओ,
चर्च भैया।
कर लो कर लो………

चाहे करो मस्ती,
चाहे पाओ ज्ञान।
सैर से कर लो ,
जीवन खुशहाल भैया।
कर लो कर लो……….

स्वरचित
सपना (स. अ.)
प्रा.वि.-उजीतीपुर
वि.ख.-भाग्यनगर
जनपद-औरैया

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।