आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ, झाँकी हम विज्ञान की। भारत के कण कण में समाई, गाथा देखो विज्ञान की। विज्ञान ने सुलझा दीं सारी, मुश्किलें इन्सान की। जड़ से मिटा दीं दिमाग से, भ्रांतियाँ इंसान की। बिना पंख हम उड़ना सीखे, ये कृपा है विज्ञान की। घर के हर कोने में […]

आई रे आई रे आई, बसन्त ऋतु आई रे आई। लाई रे लाई रे लाई, खुशियों के ढ़ेर भर लाई। कलियाँ चटकी,फूल मुस्काए, भँवरे उनपर देखो मंडराए। पवन चली पुरवाई , बसन्त ऋतु आई रे आई। आई रे आई रे आई, बसन्त ऋतु आई रे आई……… खुशबू बिखरी,गुलशन महके, वृक्षों […]

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पुण्यतिथि विशेष ना कोई खड्ग था, ना ही कोई ढाल। तेरी लाठी ने ही बापू, कर दिया कमाल। आँधियाँ बुझा ना पाईं, बापू तेरी मशाल। फिरंगियों का तूने, किया था बुरा हाल। माँ भारती का तुमसे, देखा ना गया हाल। तोड़नी थीं बेड़ियां, गुलामी की हर हाल। […]

मतदान दिवस विशेष…..     चलने लगी पुरवैया, देखो बदलाव की। आई है बेला फिर से, देखो मतदान की। ओ बहनों आओ, माताओं आओ। ओ भैया आओ, भाभी भी आओ। कर लो अब मतदान रे। चलने लगी………… जो झूठे मूठे , सपने दिखाए। धन और दारू का, लालच दिखाए। उसे ना […]

कर लो कर लो, भारत की सैर भैया। मिल जाएंगे , खुशियों के ढेर भैया। कर लो कर लो…… चाहे जानों इतिहास, चाहे जानों भूगोल। चाहे जानों धरती है, गोल भैया । कर लो कर लो……. चाहे देखो रंग रूप, चाहे देखो पोशाकें। चाहे सुन लो, अनेकों बोल भैया। कर […]

थल सेना के हम जवान, दुश्मन से कभी ना डरते हैं चौकीदार हैं हम भारत के, सरहद की चौकसी करते हैं। कड़कड़ाती सर्दी हो या, हो गर्मी कितनी भीषण। आँधी आए या आए तूफ़ान, हम कभी ना छोड़ें अपना रण। फौलादी सीने को अपने, भारत माँ की ढाल बनाते हैं। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।