चलने लगी पुरवैया

Read Time0Seconds

मतदान दिवस विशेष…..    

चलने लगी पुरवैया,
देखो बदलाव की।
आई है बेला फिर से,
देखो मतदान की।

ओ बहनों आओ,
माताओं आओ।
ओ भैया आओ,
भाभी भी आओ।
कर लो अब मतदान रे।
चलने लगी…………

जो झूठे मूठे ,
सपने दिखाए।
धन और दारू का,
लालच दिखाए।
उसे ना देना मतदान रे।
चलने लगी………….

गाँव शहर जो,
निर्मल बनाए।
वादे अपने जो,
सारे निभाए।
देना उसे ही मतदान रे।
चलने लगी…………

पाँच बरस तक,
जिसने रुलाया।
काम हमारा ना,
जिसने कराया।
अब देना उसको ठेंगा रे।
चलने लगी………….

हम जिसको चाहें,
राजा बनाएं।
हम जिसको चाहें,
रंक बनाएं।
सही गलत पहचान रे।
चलने लगी………..

जाति धर्म से ,
ऊपर उठकर।
अच्छे नागरिक,
तुम सब बनकर।
करना सब मतदान रे।
चलने लगी………….

वोट कोई भी ,
व्यर्थ ना जाए।
समझाने हम,
ये हैं आए।
शक्ति वोट की पहचान रे।
चलने लगी……………

स्वरचित
सपना (स. अ.)
जनपद-औरैया

0 0

matruadmin

Next Post

विद्रोह के पथ पर 'यायावर गणतंत्र'

Tue Jan 26 , 2021
गणतंत्रीय गरिमा के प्रभुत्व से आलौकिक, जन के तंत्र के साथ मज़बूती से सामंजस्य बनाता भारत का संविधान और एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में स्थापित शक्तिशाली राष्ट्र भारत सन् 1950 में जब भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू हुआ, तब से ही संघर्ष की […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।