मोदी भक्त की वेदना

Read Time3Seconds

suresh mishr
छिन्न-भिन्न कर दीजिए,उनके सारे अंग,
जो सैनिक को पीट कर,दिखा रहे थे रंग।।

फारुख अब्दुल्ला कहे,’राइट’ पत्थरबाज,
सेना को ही सौंप दो,खल का करे इलाज।।

मणिशंकर चिल्ला रहा,जैसे ऊदबिलाव,
इसे जीप पर बाँधकर,इक-दो गली घुमाव।।

बेशर्मी की हद करे,सुश्री शबनम लोन,
कोई मुझको दीजिए,इस हरहठ का फोन।।

महबूबा के मोह को,छोड़ दीजिए यार,
पत्ती-डाली छोड़कर,जड़ में करो प्रहार।।

मोदी जी इस तरह की,मत पहुँचाओ पीर,
ऐसे में तो आ चुका,’पीओके-कश्मीर’।।

पूरे हिंदुस्तान ने,दिया तुम्हें जो मान,
मोदी साहेब मत करो,जज्बे का अपमान।।

काश्मीर धूँ-धूँ जले,सुलग रहा बंगाल,
इस चुप्पी पर हे नमो,डूब मरो तत्काल।।

बम किस खातिर बने हैं,क्यों लाए हथियार,
‘तोप-मिसाइल’ शस्त्र का,डालो चलो अचार।।

भूल गए हम सर्जिकल,भूला सारा प्यार,
या तो गद्दी छोड़ दो,या अब करो प्रहार।।

                                                                                  #सुरेश मिश्र

परिचय : सुरेश मिश्र मुम्बई में रहते हैं। आप वर्तमान में हास्य कवि के रुप में कई मंचों से काव्य पाठ करने के अनुभवी हैं। कवि सम्मेलनों में मंच संचालन भी करते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शिक्षा नीति के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे गए पत्र

Sat Apr 15 , 2017
माननीय, नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं व संस्कृति आदि से संबंधित सुझाव विचारार्थ सादर प्रस्तुत हैं- संघ की राजभाषा हिन्दी व राज्यों की भाषाओं का शिक्षण 1.भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार हिन्दी संघ की राजभाषा है और अनुच्छेद 351 में यह निर्देश है कि संघ का यह कर्तव्य […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।