01 सावन आए बादल उमड़ के बरखा लाए। 02 डाली के झूले बनते इतिहास अब सावन। 03 खिल जाता है साजन का साथ पा हाथों का रंग। 04 मोर नांचते कोयल है बांचती घर मेंहदी। शशांक मिश्र भारती (शाहजहांपुर) Post Views: 20

मन में उलझन ज़हन में विचारों का सैलाब करवट लेते तकिया सुधारते गुज़री रात आँखे कड़वाती नींद कोसों दूर ज़हन में विचार का सैलाब थमता नहीं आख़िर ये हलचल किस बात की ये उलझन कैसी क्या अपने ही घर में किसी अजनबी की घुस पैठ की आहट जिसे अपनाया ह्रदय […]

जिस प्रेम का कारण बताया वह प्रेम नहीं होता, प्रेम के साथ क्यों कोई संबंध नहीं है ! क्या राधा कृष्ण के बीच कोई प्रेम का कारण हम कभी जान पाये !! नहीं ना…। यह तो अद्भुत कई जन्मों का प्रेम है।प्रेम के भीतर हेतु होता ही नहीं, यह अकारण […]

प्रतिदिन जिस भाव को जीती हूं ,सोचती हूं क्या हि अच्छा होता जो यूंही इस समय चक्र से कहीं दूर उस समय चक्र को बांध कर जी लिया होता , कितनी ही अबोली बातों को यूंही उस कालबंध से इस काल तक., ला न सकी होती और तुम्हारा मेरी बातों […]

स्त्रियाँ सिर्फ प्रेम होती हैं, अगाध प्रेम, सागर की तलहटी के मानिन्द जिसकी गहराई की, कोई माप नहीं! क्षितिज के आँचल सी सुर्ख, आँखों को लुभाती, आकाश सी विस्तृत, मन को ठन्डक पहुचाती, दशों दिशाओं सी, रिश्तों में गुथीं ! जिसका कोई ओर छोर नहीं ! फूलों सी…महकती, चिड़ियों सी […]

घने अंधेरा को काटेगे अमा निशा मे प्रकाश बांटेगे दीपो ने यह ठाना है अंधेरा दूर भगाना है दीपावली मनाना है नही अंधेरा राज चलेगा तम का जोर अब नही चलेगा दीप पंक्ति जलाना है दीपावली मनाना है अंतर तम भी दूर करेगे अब तो मन मालिन्य कटेगे श्वेत चांदनी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।