वैराग्य है राग की विरुद्धार्थी संकल्पना। राग है सांसारिक सुखभोग से जुड़ना, तो वैराग्य है राग से विरत होने, मुक्त होने की अवस्था। यह है सुखभोगों से विरक्ति अर्थात् त्याग का मार्ग, छोड़ने का मार्ग। राग छूट जाए, मोह का बँधन टूट जाए, तो लोभ भी छूट जाए, क्रोध भी […]

शिकायतों, आलोचनाओं से दुःख क्यों होता है? मनोवैज्ञानिक रूप से देखें तो किसी भी शिकायत की सबसे प्रमुख वजह है निर्भरता। निर्भरता उम्मीद की साथिन भी होती है और संतति भी। उम्मीद है कि खाना अच्छा मिलेगा, नहीं मिला तो शिकायत है। अगर बच्चे से उम्मीद है 90 प्रतिशत की […]

क्या ज़्यादा कीचड़ उछलने के कारण ही ज़्यादा खिला कमल? दरअसल बीजेपी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा सत्ता में पुनर्वापसी के कारणों को राजनीतिक पंडित अलग-अलग तरह से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जहाँ कुछ  इसका कारण मोदी लहर को मानते हैं, वहीं ऐसे भी कम नहीं हैं, जो […]

वैश्वीकरण के इस दौर में सांस्कृतिक अन्तःक्रिया और समंजन की प्रकिया में एक त्वरा परिलक्षित हो रही है। संस्कृति के महत्तम-अवयव के रूप में साहित्य भी इससे असंपृक्त नहीं है। इस संदर्भ में दृष्टव्य है कि भारतीय-भाषाओँ में जहाँ पहले सिर्फ अंग्रेजी-काव्य का व्यापक प्रभाव था, वहीं आज जापानी-काव्य-विधाओं ने […]

माँ दुर्गा की उपासना की उत्तमावस्था है महानवमी ! पूर्ण निष्ठा से की गई साधना इस दिन सिद्धि में परिणत होती है। मान्यता है कि इस दिन तक आते-आते साधक साध ही लेता है और नौवें रूप में माँ सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट होती हैं , जो सिद्धि और […]

नवरात्र  के आठवें दिन पूर्वसंचित पापों को धोने वाली पराम्बा माता के आठवें रूप  महागौरी की उपासना का दिन है । भक्तों के सभी कल्मष धोने वाली, अमोघ शक्ति और आशुफलदायिनी ‘महागौरी’ का शाब्दिक अर्थ है ‘महती गौर वर्ण की’ । ऐसी आश्वस्ति है कि शिव को पति के रूप […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।