“मम्मी, मैं रात तक वापस आऊँगी, हैकाथॉन है।” आव्या जल्दी-जल्दी बैग पैक करते हुए बोली। मम्मी ने चिंतित होकर पूछा- “इतनी रात तक? वहाँ सब लड़के ही होंगे ना?” आव्या मुस्कुराई- “कोड में लड़का-लड़की नहीं होता मम्मी, बस दिमाग़ होता है।” रात 2 बजे, मम्मी ने फोन किया- “बेटा, सब […]
भावना शर्मा
परिचर्चा संयोजक- भावना शर्मा, दिल्ली बच्चों का बचपन और उनका समेकित विकास केवल शिक्षा ही नहीं अपितु पारिवारिक दायित्वों, रिश्तें–नातेदारों, माता-पिता, दोस्त इत्यादि से परिपूर्ण होता है। नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत भाषा, व्यक्तित्व इत्यादि शिक्षण तो विद्यालयों में करवाया जा रहा है किन्तु बच्चों के नैतिक विकास में परिवारों […]
