जीवन से नदारद—–प्यार हो गया। आदमी का तामसी व्यवहार हो गया।। जिसे भी देखो —–बस भाग रहा है। धन-दौलत ही जीवन — सार हो गया।। गायब हो गई है —-बाज़ारों की रौनक। ऑनलाईन सारा —-व्यापार हो गया।। माँ-बाप को अनाथालय में छोड़ कर। वो कहता है —घर गुलज़ार हो गया।। […]

कहाँ हो रही चूक, कहाँ हो रही गड़बड़. आखिर क्या आंतरिक इस संसार में झगड़े की जड़।। हे मानव- संयत कर अपना मन, कुछ तो कर चिंतन.. यह सत्य है कि, एक-न-एक दिन होगा। तेरा इस संसार से बिछोह , फिर क्यों करता है- इतना मोह।। काहे को तू मेरा-मेरा […]

मेरा भारत महान है, यह बलिदानों की धरती। अम्बेडकर जैसी विभूति से, अपनी किस्मत सँवरती।। १४ अप्रैल १८९१ को, जन्मे प्यारे भीमराव.. रत्नागिरि जनपद में, अम्बावढ़े गाँव।।। गाँव का लड़का पढ़कर, बन गया डॉ.आम्बेडकर। हर कुप्रथा का विरोध, किया उन्होनें डटकर।। समाज सुधार के काम किए, छोड़ के सारे भोग। […]

मन मत हो निराश, बड़ी सरस जिंदगी.. तू उसे समझने की, कोशिश तो कर। सिर्फ रात-दिन, सपने ही न देख.. उन्हें सच करने की, कोशिश तो कर। सब बातों को, नसीब पर न छोड़.. मसलों को हल करने की, कोशिश तो कर। चाँद पर पहुँची दुनिया, तू हौंसला रख.. कुछ […]

हे नारी शक्ति , आज स्वतंत्र हो तुम। पढ़ लो जितनी चाहे शिक्षा, आज नहीं देना पड़ती सीता की भाँति अग्नि परीक्षा। चढ़ो हिमालय की चोटी पर, अपना तिरंगा लहराओ। जुड़ कर ईसरो से, चाँद पर जा अपना परचम फहराओ। या फिर मदर टेरेसा बन करो दीन-हीन की सेवा, या […]

स्वर्ग सिधारे पिताजी, बेटा निभा रहा है फर्ज.. धीरे-धीरे उतार रहा है, पिता का लिया–कर्ज। कर्ज में वह पैदा हुआ, कर्ज में ही मर जाएगा.. कर्ज चुकाने के लिए, फिर कर्ज कर जाएगा। कर्ज एक ऐसा रोग है, जिसका न कोई इलाज.. घर-खेती सबकुछ बिके, बिक जाती है–लाज। बोल कर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।