दीपक से हमने सीखा, जलना क्या होता है । तिल-तिल जल-जल करके, ऐसे मरना क्या होता है । दीपक सबको देती उजाला, खुद अधियारों में रहकर । सीख लो उससे जीना तुम भी, दुःख सहना होता है क्या ? विरह व्यथा होती बड़ी दारूढ़, सहनाही पड़ता है । अपनों के […]

आया है प्यारा वसंत मन भावन पावन वसंत । धरती पर छायी हरियाली नयी उमंग छायी खुशहाली । कोयल काली कूक रही है वृक्षों पर वह झूल रही है । नव कोपल डाली मुसकाये देखो अब ऋतुराज जी आये । पीला पीला खिला है सरसों ऐसा दृश्य दिखा था बरसों […]

अबूधाबी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अरबी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को अपनी अदालत में तीसरी अधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है । न्याय तक पहुँच बढाने के लिहाज से यह कदम उठाया गया है । अबूधाबी न्याय विभाग (एडीजेडी) ने शनिवार को कहा कि उसने […]

हिंदी साहित्य में नारी का योगदान, नारी का जीवन बहुत ही संघर्ष से विरत है महिला साहित्यकारके लिए सबसे पहले बाहरी संदर्भों में उसका आंतरिक समय होता है, जहां वह जीती और सांस लेती है, और वहीं दुसरी ओर समय की चुनौतिया जिससे वे बिल्कुल परे होती है । उनके […]

कुम्भ मेले का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है । कुम्भ दो प्रकार का होता है – अर्ध कुम्भ और पूर्ण कुम्भ या महाकुम्भ । कुम्भ मेले का इतिहास लगभग 850 साल पुराना है और ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य जी ने इसकी शुरुवात की थी, परंतु कुछ […]

है राह यह सुहाना, चाहे शीश हो कटाना । तुम सुन लो देशवासी, यह देश है हमारा । भारत के ऐ सपूतों, विश्वास को जगाओं । कमजोर करके दुश्मन को, देश से भगाओं । छायी रहे सदा ही, स्वाधीनता की लाली । आजाद हुई जननी, छाये सदा हरियाली । आकाश […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।