सुबह की पहली किरण हर पल मुझसे यह कहती है, तू क्यों उदास बैठी है? ऐसे उठ और चल तेरी मंज़िल आज ख़ुद तेरा इंतज़ार करती है। क्यों गुमनाम अंधेरों में बैठी हो? ऐसे आज तू उठकर बाहर निकलने की कोशिश तो कर, रोशनी की किरण आज ख़ुद तेरा इंतज़ार […]

स्त्री देह को रौंदने वाली पाशविक मनोवृत्ति किसी युग में नहीं बदलेगी। कितने ही आन्दोलन हो जाएँ, कुर्बानियाँ दी जाएँ, स्त्री को उपभोग की वस्तु समझना बंद नहीं हो सकता कभी। प्रदर्शन की वस्तु, ख़रीदी-बेची जाने वाली चलती-फिरती गुलाम से अधिक नहीं है स्त्री देह का सच। बदला लेना है […]

योग दिवस पर वे बेचारे बहुत अफसोस कर रहे हैं जो योग नहीं कर पाए फेसबुक के लिए फोटो भी नहीं मिला। अगर आप मिडिल क्लास से आते हैं और ‘जी’ रहे हैं तो आपसे बड़ा ‘योगी’ कौन? जिंदगी की योगा क्लास कभी खत्म नहीं होती आप एक आसन की […]

ध्यान का पुंज है ज्ञान का कुंज है शब्दभावों की अठखेली है अंत:प्रेरणा से बह निकली है कविता मेरी अंतरंग सखी है कि जगा देती है कभी भी हाथ पकड़ कर उठा देती है कलम थमा जता देती है कि उसे भावों की दुशाला ओढ़ वक्त के शिलालेख पर सजना […]

रैन तुम्हारे संग बीते फिर , बीते भोर ख्यालों में, बन पगली फिर फिरा करुं मैं , तपते हुए उजालों में । मैं बरखा बन-बन बरसुं, बन पतझर झर- झर जाऊँ रे, शीत ऋतु में तपुं आग सी, ग्रीष्म में ठंडक पाऊँ रे, करूँ कल्पना प्रेम की अब चाहे होगा […]

हर पल जीवन का सँवार कर नारी भर देती है गागर में सागर जहाँ जहाँ पहुँच सकते हैं भास्कर तोड़ लाती ये तारे वहाँ जाकर ये छाई रहती हर डगर,हर पहर क्योंकि इनके बिना नहीं है गुजर-बसर इसीलिए कहते हैं महिलाओं की बात ही कुछ और है… दिनचर्या इनकी बड़ी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।