कोई भी समाज यदि पुरुष प्रधान है तो भी और महिला प्रधान है तो भी, एक दिन उसका पतन हो ही जाएगा। वही समाज आगे बढ़ेगा जो वास्तविक समानता पर आधारित होगा। तब परिवार स्वस्थ संस्थाओं का रूप लेंगे और उज्ज्वल व्यक्तियों के व्यक्ति समाज और […]

जिंदगी की दौड़ भाग में खो सा गया मेरा बचपन बेफिक्र मौज मस्ती वाला मेरा राज दुलारा बचपन माँ के आँचल में छुपजाना नजर उतारने वाला बचपन भले ही माँ भूखी हो मगर मुझे तृप्ति कराने वाला बचपन आज क्यों खो सा गया ? या मै बचपन को पीछे छोड़ […]

सखी ! रहा कहां कब वह बसंत मधुमास का प्यारा वो बसंत बढ़े जंगल कंकरीट के अब खो गया उन्हीं में यह बसंत जब पीली सरसों के खेतों में  हम सखियाँ दौड़ लगाते थे चने ,मटर की मीठी बाली को घुसकर खेतों में सब खाते थे सखी कहां .. सखी […]

फूलों सी, कलियों सी कोमल बेटियाँ, माँ का प्यार, पिता की इज्ज़त बेटियाँ | कुल की शान, अभिमान की पगड़ी बेटियाँ, घर-परिवार की आन, मान, शान,जान बेटियाँ | सीता, सावित्री, दुर्गा सी होती वीरांगना बेटियाँ, आज जीत कर ला रहीं पदक, भारत की बेटियाँ | सादगी से बड़ी नहीं कोई […]

मैने की आईने से दोस्ती संवारता खुद को जाने क्यों लगता मुझे प्यार हो गया नयन कह जाते बिन बोले नींद जाने कौन उड़ा गया निहारते रहते सूनी राहों को शब्दों को गढ़ता बन शिल्पकार दिल के अंदर प्रेम के ढाई अक्षर सहंम सी जाती अंगुलियां हाथों की अंगुलियां बनी […]

                  घाटी नर्क बनाकर दिल्ली बैठी पहन चूडियाँ किन्नर रोना रोती है |       सिंहों के जिस्म कुत्ते नोच-नोच खाते शौर्य-वीरता के सम्मुख दीवार बना कानून राजनीति बंदूकों के मुख ताले लगवाती है |                  देखो कैसे स्वार्थवश दिल्ली विषधरों को दूध पिलाती है मेरे देश के वीर जवानों को […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।