चन्द्रसेन विराट स्मृति प्रसंग सम्पन्न, हिंदी गीत की अखंड परंपरा पर किया विमर्श

विराट अलहदा व्यक्तित्व के धनी रहे- श्री भारद्वाज

गीत संवेदनाओं की परिभाषा है- गोपाल माहेश्वरी

इंदौर। हिंदी साहित्य जगत के प्रतिष्ठित गीतकार चन्द्रसेन विराट की स्मृति में शुक्रवार को शाम संतोष सभागार में
साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् तथा मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा स्मृति प्रसंग आयोजित किया। कार्यक्रम में बीज वक्तव्य देवपुत्र के संपादक गोपाल माहेश्वरी ने दिया व समारोह की अध्यक्षता इंदौर के वरिष्ठ गीतकार चन्द्रमान भारद्वाज ने की।
अतिथि अभिनंदन व शब्द स्वागत साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने किया।

श्री दवे ने गीत ऋषि चंद्रसेन विराट को याद करते हुए हिंदी गीत की परंपरा पर बात की। उन्होंने कहा कि ‘विराट जी उस गीत परम्परा के ध्वजवाहक रहे हैं, जिन गीतों का संबंध जीवन के प्रत्येक चरण से है।’

गोपाल माहेश्वरी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि ‘गीतों का जुड़ाव मनुष्य की संवेदनाओं और भावनाओं से होता है, मनुष्य की मनुष्यता को बचाने में भी गीतों का महत्त्व है, जन्म से लेकर मृत्यु तक गीत का जुड़ाव भारतीय मनुष्य से लगातार बना रहता है।’

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार चन्द्रभान भारद्वाज ने कहा कि ‘विराट जी ने कभी नौकरी कर रहे चंद्रसेन ढोके और गीत लिख रहे चंद्रसेन विराट को कभी एक नहीं किया, वो शासकीय सेवा में रहते हुए अलहदा गीतकार रहे। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व में जीवन दर्शन, प्रेम और साफ़गोई दिखाई देती थी।’

आयोजन के दूसरे सत्र में इंदौर के गौरव साक्षी, देवास के बलराम बल्लू, धरमपुरी के महेन्द्र सिंह पंवार, खरगोन के कांता प्रसाद ‘कमल’, इंदौर के अशुल आराध्यम व बड़वानी के हिमांशु मंगला वर्मा ने सहभागिता की। इसके साथ ही रीवा की अपूर्वा चतुर्वेदी, इंदौर की काजल तिवारी, विदिशा की शिवानी रघुवंशी एवं सीधी की क्रांति पाण्डेय भी अपने गीतों और विचारों के माध्यम से विराट जी का भी स्मरण किया।
कार्यक्रम में आभार स्थानीय संयोजन व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.अर्पण जैन ने व्यक्त किया। आयोजन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की विभिन्न संस्थाओं वामा साहित्य मंच, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, विचार प्रवाह, इंदौर लेखिका संघ व पंचकन्या सोशल वेलफेयर फाउंडेशन का सहभाग रहा।

इस मौके पर प्रदीप नवीन, देवेंद्र सिंह सिसौदिया, ज्योति जैन, डॉ. अखिलेश राव, मुकेश तिवारी, समीक्षा नायक, सुनीता दवे, शीला बड़ोदिया, कौस्तुभ माहेश्वरी, अक्षत व्यास आदि सुधी साहित्यकार मौजूद रहे।

matruadmin

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।