इफ्तार को नमस्कार !

vaidik

राष्ट्रपति भवन में अब इफ्तार की पार्टी नहीं होगी, यह खबर पढ़कर मेरे कुछ वामपंथी और मुसलमान मित्रों ने मुझे फोन करके कहा कि अब राष्ट्रपति भवन पर भी आरएसएस का कब्जा हो गया क्या ? उन्होंने पूरी खबर नहीं पढ़ी। वे खबर का शीर्षक पढ़कर ही उत्तेजित हो गए। शायद उन्हें पता नहीं कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की अवधि में भी इफ्तार की पार्टियां राष्ट्रपति भवन में नहीं होती थीं। क्या अब्दुल कलाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता थे ? क्या वे मुसलमान नहीं थे ? वास्तव में इस तरह की पार्टियों में लाखों रु. पानी की तरह बह जाते हैं। लोग बहुत सारी जूठन गिराते हैं। ये पार्टी होती है, रोज़े के बाद लेकिन दिन भर भूखे-प्यासे रहकर संयम रखने के बाद पार्टी में लोग सारा सयंम भूल जाते हैं। उन्हें बदहजमी हो जाती है। रमजान के पीछे जो आत्मसंयम और तप की भावना है, इन ठाठ—बाट वाली पार्टियों में प्राय: उसका उल्लंघन होता है। इसके अलावा ऐसी पार्टियों में ज्यादातर लोग तो वे ही होते हैं, जो रोज़ा नहीं रखते। मैं यह बात सैकड़ों इफ्तार की पार्टियां भारत, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान में देखने के बाद लिख रहा हूं। राष्ट्रपति भवन अगर सिर्फ इफ्तार की पार्टी रद्द करता तो मैं उसका विरोध करता लेकिन उसने स्पष्ट कर दिया है कि इस प्रकार के किसी भी धार्मिक कर्मकांड को वह वहां नहीं होने देगा। जब भारत को आप पंथ-निरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष कहते हैं तो कम से कम सरकार को तो पंथ-निरपेक्ष रहने दीजिए। भारत में रोज़ ही इतने तीज़-त्यौहार होते हैं कि यह उत्सवप्रेमी देश बन गया है। इन पर सरकारी पैसा क्यों खर्च किया जाए ? गैर-सरकारी स्तर पर जो भी त्यौहार मनाना जरुरी हो, लोग जरुर मनाएं। एक-दूसरे के त्यौहार भी मनाएं। प्रेम और सदभावना फैलाएं लेकिन अपने नेता लोग जो ढोंग करते हैं और पाखंड फैलाते हैं, उस पर वे हंस दिया करें। कर्नाटक के चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने जैसी धार्मिक मसखरी की, वह देखने लायक थी। इन नेताओं के जीवन में धर्म का क्या स्थान है ? इनका ब्रह्म तो वोट और नोट होता हे। उसके लिए जनेऊ तो क्या, वे कुछ भी धारण कर सकते हैं। यदि वे सचमुच जाति और धर्म का सम्मान करते होते तो इनके नाम पर वे वोट कभी नहीं मांगते, क्योंकि अंधा थोक वोट पाने के लिए वे इनका बेजा इस्तेमाल करते हैं। इफ्तार को नमस्कार कहनेवाले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद विशेष शाबासी के हकदार हैं, क्योंकि अब्दुल कलाम तो मुसलमान थे लेकिन कोविंद ने हिंदू होकर भी यह हिम्मत की। देश के सभी सत्तारुढ़ नेताओं के लिए राष्ट्रपति प्रेरणा-पुरुष बन गए हैं।

              #डॉ. वेदप्रताप वैदिक

matruadmin

Next Post

संजू

Sat Jun 9 , 2018
इदरिस खत्री द्वारा,,,, दोस्तो संजय दत्त की ज़िंदगी किसी फिल्मी कथा से कम नही रही है राजकुमार ने बायोपिक बना कर निश्चित ही कोई सट्टा नही खेला संजय की ज़िंदगी नामा हर भारतीय जानना चाहता है नाम, शोहरत, पैसा अगर आता है तो नशा, सेक्स, पीछे से दबे पांव आना […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।