कभी-कभी मुस्कान से दूर तक पहुंच जाना

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कभी-कभी मुस्कान लिये दूर तक पहुंच जाना,
कभी-कभी प्यार लिये दूर तक आ जाना,
योंही अचानक बढ़ा देना राहों की लम्बाई,
समय को खोल देना सबके लिए दूर तक,
जैसे नदी निकल जाती है दूर
पक्षियां उड़ कर बस जाती हैं दूर,
मनुष्य उजाले में आ जाता है दूर-दूर तक,
बीज पहुंच जाता है एक देश से दूसरे देश,
ऐसे ही प्यार को ले आना दूर-दूर तक।
कभी-कभी मुस्कान ले दूर तक हो आना,
कभी-कभी निडर हो दूर तक आ जाना,
कभी-कभी घर की हँसी को दूर-दूर तक बिखेर देना,
कभी ले जाना मोहक मन को दूर-दूर तक।
असफलता कर लेती है लम्बी यात्राएं,
सफलता को जाना है उससे दूर,
हम हर साल हँसते हैं
मुस्कराते हैं सुन्दर क्षण में,
संतुष्टि से ही बनते हैं अद्भुत पुल
जो जोड़ते हैं फूल को फूल से,
हमने देखा है दूर मुस्कराता आकाश
और उसकी छवि ली है बार-बार,
एक अव्यक्त हँसी के लिए हम जाते हैं दूर-दूर तक बिना पूछताछ के।

#महेश रौतेला

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