गजल

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madhusudan
आरजू है मेरी  बस पढ़ा  दीजिये।
आप बस इतनी मुझको रज़ा दीजिये।00
हाथ पीले करो  मत अभी से मेरे,
चाहे जितनी भले तुम सजा दीजिये।01
मैं अठारह बरस से जियादा लगू।
आप शादी मेरी फिर करा दीजिये।02
नाम मेरा नही वोट  की लिस्ट में।
नाम मेरा भी उसमे जुड़ा दीजिये।03
लड़कियां शान शौकत है माँ बाप की।
इनको दिल से कभी ना विदा दीजिये।04
लाभ की योजनायें है सरकार की।
लिंक आधार से पर करा दीजिये।05
आउंगा मैं तुम्हारे यहाँ पर तभी।
भीड़ भक्तों की काफी जुटा दीजिये।06
खो न जाए कोई  भीड़ में सो सुनो।
आप सबको पता बस रटा दीजिये।07
चाहते हो अगर मुल्क को तोड़ना।
आप आपस में सबको लड़ा दीजिये।08
खेल होली का मुझको पसन्द तो नही।
प्यार से आप फिर भी लगा दीजिये।09
लोग पीछे पड़े  किस वजह क्या पता।
आप बातों को उनकी दफा दीजिये।10
होते नेता बुरे  सब कहाँ देश में।
चन्द दुष्टों को ‘मधु’गर भुला दीजिये।11
नाम~ मधुसूदन गौतम
पिता~श्री नन्दबिहारी शास्त्री
माता~ श्रीमती सन्तोष
शिक्षा~अधिस्नातक
व्यवसाय~ व्याख्याता
राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय  अटरू राजस्थान
साहित्यिक~ शौक के तौर पर कलम घिसाई
विधा का नाम—कलम घिसाई

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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