
सांसों के चलने से मेरी,
ये जिंदगी सलामत है ।
इश्क के सफ़र में मितवा,
दिल तेरी अमानत है ।।
चमन में चाहत के ग़ुल,
वफ़ा की ख़ुशबू देतें है ।
तुम मेरे हो हमदम मेरे ,
बार बार ये कहतें हैं ।।
तेरी परछाई ,तेरा अक़्स ये,
हर दम साथ रहता है ।
संगदिल नहीं हो तुम जानम,
दिल बस यही कहता है ।।
#डॉ.वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Thu May 31 , 2018
सहज, सौम्य और सरल जिनका मिजाज है, सबकुछ होते हुए भी फकीराना ठाठ, आजा़द पंछी की तरह गगन को नापना, मजाक और मस्ती की दुनिया से कविता खोजने वाले, अल्हड़ और मनमौजीपन में जिन्दादिली से जीने वाला, कविता लिखने के लिए केवल मुठ्ठी उठा कर नभ को पात्र भेजने […]