तरकीब

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suresh sourabh

वह दो साल से पैंतीस हजार का कर्ज लेने के लिए बैंक के रोज चक्कर काट रहा था। उस गरीब का सपना बस एक परचून की दुकान थी,पर बैंक वाले रोज कोई न कोई कहानी सुनाकर उसे टरका देते। एक दिन किसी ने उसे एक तरकीब सुझाई। अगले दिन वह बैंक गया। बैंक मैनेजर से एकांत में मिला। फिर उसे कुछ दिनों बाद बैंक ने तीस लाख कर्ज दे दिया। उसने उन रुपयों से व्यापार शुरू किया। कम समय में जिले के व्यापारियों में उसका नाम बढ़ने लगा।
समय बीतता गया। वह कई बैंकों से  कई करोड़ रूपया निकालते हुए अपने व्यापार को देश की सीमाओं के बाहर तक फैलाता गया।अचानक एक दिन किसी बैंक ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रूपये निकालने का उस पर केस दर्ज किया। लेकिन अब वह परदेश की सैर कर रहा था। देश की मीडिया और अदालतें अब रोज उसके लिए हाय -तौबा मचाने लगी। फिर कई और बैंक घपले -घोटाले का केस उस पर दर्ज करते गये। उसे देश वापस कौन लायेगा?बैंकौं ने क्यों चूक की ? अब यह अल्लाह ही जाने।

                               #सुरेश सौरभ

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।