ख़्वाब सजाते हैं आँखों के
जो देखे सपने होते हैं
रहते हैं उनकी पनाह में
पापा तो पापा होते हैं।
ख़्याब सजाते हैं आँखों के
जो देखे सपने होते हैं।
दिन तपते हैं रात में जलते
लहू चूसकर हम पलते हैं
करते हैं ज़िद पूरी हमारी
गलती पर परदा करते हैं
रहते हैं उनकी पनाह में
पापा तो पापा होते हैं।
ख़्याब सजाते हैं आँखों के
जो देखे सपने होते हैं।
आते हैं जब लौटके दफ़्तर
हारे थके से जब होते हैं
बन जाते हैं घोड़ा-ख़च्चर
आँसू से जब हम रोते हैं
रहते हैं उनकी पनाह में
पापा तो पापा होते हैं।
ख़्याब सजाते हैं आँखों के
जो देखे सपने होते हैं।
#श्रवण राज ‘लयरिसिस्ट राज’
परिचय :
नाम-श्रवण राज
उपनाम-लयरिसिस्ट राज
वर्तमान-शाहजहांपुर
राज्य-उत्तर-प्रदेश
शहर-शाहजहांपुर
शिक्षा-ग्रेजुएशन
कार्यक्षेत्र-गीतकार
विधा- कम्पोजिंग
प्रकाशन-कुछ प्रिंट मीडिया (2010-2011)
सम्मान- कोई नही।
ब्लॉग-कोई नही।
अन्य उपलब्धियां-फ़िल्म प्रोडक्शन वर्किंग मुंबई और निरंतर अपडेट सांग फेसबुक सोशल नेटवर्क।
लेखन का उद्देश्य- स्वतंत्र रहना।
Sat May 12 , 2018
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