संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो

ankit jain
 तूफान कभी आंधी कभी वर्षाते बनके
बाधाएं आयेगी तेरी मंजिल में बहुत सी
इन मंजलो को तुम पार कर बाधाओ से लड़ो
संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो
बच्चें जब चलना सीखते है सौ बार गिरते है
विश्वास चलने का कभी वो कम न करते हैं
तुम भी करो मन दृण पथ से भ्रमित न हो
संकल्प कर चलों तुम पथ पर बढ़े चलो
चाहे पथ में नीम सी कड़वाहटे मिले
चाहे कदम को रोकने बाधाओं का जंजाल है मिले
इन जाल से बचकर निकलो सफलता का मंत्र ले
संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो
नदियां जैसी कल कल बहती चली जाये
चलते रहो का संदेश सब को देती ही जाये
संकल्प से परिपूर्ण हो पथ को सरल करो
संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो
इतिहास ने परिश्रम के उदाहरण बहुत दिये
बहुत से वीर प्रयास से  सफल अमर हुए
तुम भी प्रयास कर नया इतिहास गढ़ चलो
संकल्प कर चलों तुम पथ पर बढ़े चलो
इस संसार में बुराई अनुशासन हीनता की वहार है
काजल की फैक्ट्री से बिन धव्वे निकलना समान है
इन बुराई को अच्छाई में अनुशासन से बढ़ चलो
संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो
बाधाएं मिले पत्थर बन तो मूर्ति में बदल दो
यदि मिले पथ में शूल तो फूलों में बदल दो
पथको के लिए रास्ता सुगम कर चलो
संकल्प कर चलो तुम पथ पर बढ़े चलो
नाम-अंकित जैन
साहित्यिक उपनाम-विरागांकित
जन्म स्थान -पथरिया
वर्तमान पता- पथरिया जिला दमोह
राज्य-मध्यप्रदेश
शहर-पथरिया
शिक्षा- बी. ए.(अध्ययनरत)
विधा -गीत/कविता/लेख
अन्य उपलब्धियाँ- संगीत में गाना और बजाना दोनों में ही समाज के चहेता
लेखन का उद्देश्य- मात्र भाषा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और हिंदी भाषा को बढ़ावा देने का प्रयास करना 

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Tue May 8 , 2018
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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।