खड़ा हो होश कर ग़ालिब
ज़हन में क्यों तू ज़िन्दा है।
मर्ज की आड़ में छिपकर
दर्द क्यों तूने दे डाला
खड़ा हो होश कर ग़ालिब
ज़हन में क्यों तू ज़िन्दा है।
दर्द के उस मसीहे का
पता हो गर बता देना
पुकारा है किसी ने आज
सोया हो गर जगा देना।
खड़ा हो होश कर ग़ालिब
ज़हन में क्यों तू ज़िन्दा है।
बाँटता तू अगर खुशियाँ
दर्द दुनियाँ में न होता
न रोता कोई भी इन्सां
दर्द न बे इन्तहां होता।
खड़ा हो होश कर ग़ालिब
ज़हन में क्यों तू ज़िन्दा है।
रहा है तू भी दुनियाँ में
देखी है तूने भी दुनियाँ
पूछता हूँ बता मुझको
तू भी तो बाशिन्दा है।
खड़ा हो होश कर ग़ालिब
ज़हन में क्यों तू ज़िन्दा है।
#श्रवण राज ‘लयरिसिस्ट राज’
परिचय :
नाम-श्रवण राज
उपनाम-लयरिसिस्ट राज
वर्तमान-शाहजहांपुर
राज्य-उत्तर-प्रदेश
शहर-शाहजहांपुर
शिक्षा-ग्रेजुएशन
कार्यक्षेत्र-गीतकार
विधा- कम्पोजिंग
प्रकाशन-कुछ प्रिंट मीडिया (2010-2011)
सम्मान- कोई नही।
ब्लॉग-कोई नही।
अन्य उपलब्धियां-फ़िल्म प्रोडक्शन वर्किंग मुंबई और निरंतर अपडेट सांग फेसबुक सोशल नेटवर्क।
लेखन का उद्देश्य- स्वतंत्र रहना।
Mon Apr 30 , 2018
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