बनाकर ताज शाहजहां ने,
दुनिया को तोहफा दिया है।
हर आशिक की यादों में,
मुमताज को जिंदा कर दिया है॥
संगमरमर से तराशा है,
मुहब्बत की निशानी को।
जज्बातों से लिख दिया,
प्यार की कहानी को॥
मिसाल ए मुहब्बत को,
रूबरू-ए-दुनिया रख़ दिया है।
हर आशिक की यादों में,
मुमताज को जिंदा कर दिया है॥
#डॉ.वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Mon Feb 19 , 2018
शफ़क़ में सफ़ेद …. समंदर नमक का चमचमाते पुखराज के टुकड़ों-सा, लोगों का हुज़ूम फिर भी जाने क्यों,तन्हा छोटे-छोटे गड्ढों पर पड़ा पानी लगते उसके आँसू क्या लोगों के पैरों तले रौंदे जाने का दर्द ? या अकेलापन,उपेक्षा कोई खोदता,मुट्ठी में भरता उछालता,चखता फेंककर चला जाता खोदे जाने का ज़ख्म […]