अंग्रेजी विद्यालय में हिंदी में हस्ताक्षर बदलो अभियान शुरु 

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जयपुर।
५ फरवरी २०१८ को इंडिया इंटरनेशनल स्कूल(जयपुर) में ‘हस्ताक्षर बदलो अभियान’ के अंतर्गत मातृभाषा . कॉम की पुस्तक(काव्य संग्रह) पर स्कूल के निदेशक डॉ.अशोक गुप्ता ने हिंदी में हस्ताक्षर कर इस अभियान का शुभारंभ किया। प्राचार्या श्रीमती माला अग्निहोत्री  ने भी पहली बार हिंदी में हस्ताक्षर कर अपने आपको गौरवान्वित महसूस किया।
इस दौरान विद्यालय की उप-प्राचार्या व परीक्षा नियंत्रक श्रीमती निधि मिश्रा ने भी हिंदी में हस्ताक्षर कर प्रसन्नता व्यक्त की।विद्यालय के अकादमिक सलाहकार मोहनलाल अग्रवाल व श्री राजबहादुर ने भी हिंदी में हस्ताक्षर कर प्रसन्नता व्यक्त जताई। ऐसे ही विद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्षा श्रीमती सविता भार्गव ने भी हिंदी में हस्ताक्षर कर हिन्दी का मान बढ़ाया। सभी ने विद्यालय के हिन्दी अध्यापक रिखबचन्द राँका ‘कल्पेश’ को मातृभाषा उन्नयन संस्थान(इंदौर)द्वारा ‘भाषा सारथी’ सम्मान से सम्मानित करने पर बधाई व शुभकामनाएं दी।
भाषा सारथी श्री रांका के निवेदन पर सभी ने हिंदी में हस्ताक्षर किए। आपने बताया कि,हमारा विद्यालय इंगलिश माध्यम का होने पर भी निदेशक से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी ‘गुड मोर्निंग’ नहीं,नमस्कार ही बोलते हैं। किसी भी कार्यक्रम का शुभारम्भ ‘ नमस्कार’ शब्द से ही किया जाता है।
इस अवसर पर डॉ. गुप्ता ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष डॉ.अर्पण  जैन ‘अविचल’ यह अभियान चलाने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी। अंत विद्यालय के हिंदी अध्यापक व भाषा सारथी ‘कल्पेश’ ने सभी को धन्यवाद दिया।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।