प्रकृति और हम

1
0 0
Read Time1 Minute, 55 Second
avdhesh
प्रकृति स्वयं में सौम्य सुशोभित,सुन्दर लगती है।
देख समय अनुकूल हमेशा,सोती-जगती है॥
जब मानव की छेड़खानियाँ,हद से बढ़ जाती।
जग जननी नैसर्गिक माता,रोती बिलखाती॥
लोभ मोह के वशीभूत हो,जब समता घायल।
बिन्दी पाँवों में गिर जाती,माथे पर पायल॥
अट्टहास कर मानव चुनता,जब उल्टी राहें।
महामारियाँ हँसकर गहतीं,फैलाकर बांहें॥
चेचक हैजा प्लेग पीलिया,कर्क रोग टीबी।
रक्तचाप से पीड़ित बापू,माँ-बच्चे बीबी॥
सूर्य कोप से जलती धरती,जलता है अम्बर।
कहीं बाढ़,सूखे का आलम,जीना है दूभर॥
भूमि कम्प से हिलती वसुधा,पेड़ों में पतझड़।
हरित प्रभावों से मुरझाती,जीवन आशा जड़॥
आबादी के बोझ तले भू,दबकर अकुलाती।
जन घनत्व की कठिन वेदना,रोकर सह जाती॥
जलविहीन नदियों से पानी,बादल न पाए।
प्यासी भू पर बोलो कैसे,पानी बरसाए॥ ।
अतुल सम्पदा का दोहन कर,मुस्काए थे हम।
आँख मूँदकर कछुए जैसे,भूले थे हर ग़म॥
बढ़ता जाय प्रदूषण प्रतिपल,मानव के कारण।
मानव ही लाया विनाश को,मानव ही तारण॥
पंच भूत को मान साक्षी,कर लेंगे ये प्रण।
पर्यावरण बचाव हेतु हम,जीतेंगे हर रण॥
भू ध्वनि वायु रसायन जल में,मत खोना जीवन।
चलो उगाकर पौधे निशदिन,है बोना जीवन॥
कहता कवि ‘अवधेश’ संतुलित,हो वसुधा अम्बर।
स्वच्छ रखेंगे सारी दुनिया,जैसे अपना घर॥
                                                               #अवधेश कुमार ‘अवध’

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “प्रकृति और हम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सच्चे मित्र

Tue Feb 6 , 2018
दो मेधावी छात्र विनय और तेजस पक्के मित्र गुरुकुल में रहते थे। नाम अनुरूप विनय बहुत ही अच्छा और तेजस गुस्सैल बालक था।  विनय चाहता था तेजस भी उसी के जैसा विनयशील बन जाए,इसके लिए विनय ने अपने गुरु रामदास जी का सहारा लिया। गुरु ने दोनों को अपने पास […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।