मैं तुझ आत्मा का कौन हूँ!
पल-पल का साथी,
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं।
तेरे सब रिश्ते-नातों का सात्विक सार हूँ मैं,
तुझमें ही रचा-बसा,घुला-मिला
तुझसे भी पार हूँ मैं।
पल-पल का साथी,
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
तुझसे भरा हुआ,तुझसे भी रिक्त,
तेरे ममत्व से स्वयं को कर अभिषिक्त
एक पूर्ण विकसित संसार हूँ मैं,
पल-पल का साथी
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
तुझ में निमग्न,स्वयं से संलग्न
फिर भी रहता तुझसे अभिन्न,
तुझमें बहता रक्त संचार हूँ मैं,
पल-पल का साथी
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
तेरे आनंद की चाह में,
नश्वर दुखों की आह में
तेरी नैया का खेवनहार हूँ मैं,
पल-पल का साथी
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
तेरी कमजोरी में बनता बल,
तू गिरे तो मैं बनता सम्बल
तू माने तो समग्र परिवार हूँ मैं,
पल-पल का साथी
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
तेरे चहकने की चाहत में,
तेरे हर स्वभाव हर आदत में
तेरी हंसी में बहती बयार हूँ मैं,
पल-पल का साथी
तेरा हर व्यवहार हूँ मैं॥
#आचार्य नवीन ‘संकल्प’
परिचय:आचार्य नवीन का साहित्यिक उपनाम-संकल्प है। आपकी जन्मतिथि-२१ फरवरी १९८९ और जन्म स्थान-ग्राम-बजीना(जिला-अल्मोड़ा,उत्तराखंड)है। वर्तमान में आप पतंजलि योगपीठ हरिद्वार(उत्तराखंड)में निवासरत हैं। उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार शहर से संबंध रखने वाले आचार्य नवीन की शिक्षा-बीए सहित पीजीडीएमए तथा दर्शन में आचार्य (पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से)है। कार्यक्षेत्र में आप विभिन्न सेवा प्रकल्पों में सेवारत हैं और वर्तमान में योग प्रचारक विभाग का दायित्व निभाने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। २०१२ से नौकरी छोड़कर पतंजलि योगपीठ के साथ मिलकर सामाजिक,सांस्कृतिक,आध्यात्मिक क्षेत्र में अहर्निश ही सेवा कर रहे हैं। अगर लेखन की बात की जाए तो कविता, संस्मरण,काव्य-रचना,लेख,कहानी,गीत और शास्त्रीय रचना का सृजन करते हैं। प्रकाशन में उपनिषद-सन्देश( उपनिषदों की काव्यमय रचना) पतंजलि योगपीठ द्वारा प्रकाशित है। आप ब्लॉग पर भी लेखन करते हैं। आपकी खासियत यह है कि,स्वतंत्र और अत्यंत आकस्मिक लेखन करते हैं। उपलब्धि यह है कि,पूज्य स्वामी रामदेव जी द्वारा चैनल के माध्यम से कई बार लेखन की प्रशंसा पा चुके हैं। आपकी दृष्टि में लेखन का उद्देश्य-मात्र विशुद्ध अभिव्यक्ति,सम्पूर्ण रिक्त,व्यक्त होने के भाव से भर जाना,चेतना का लेखन द्वारा ईक्षण करना तथा समय के साथ अपनी चेतना के स्तर पता करते जाना है।