बेटी तो है अभिमान हमारा,ये तुमको मैं समझाती हूं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ,ये गीत प्रेम का गाती हूं॥
बेटी को मरवाकर क्यों,बेमतलब तू पाप कमाए।
हो जाए तेरी ठंडी काया,बेटी को जो तू गले लगाए।
ये है फरमाइश इसकी,पापा इसे बस लाड़ लड़ाए।
भूल जाए तू हर दुख को,एक बार जो बेटी मुस्काए॥
बेटी बिन घर-आंगन सूना,ये आज मैं तुम्हें बतलाती हूं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ,ये गीत प्रेम का गाती हूं॥
बोलने लगी अब ये बिटिया,अब पढ़ने की बारी है।
बेटी को शिक्षित बनाओ,ये दौलत अनमोल हमारी है।
थोड़ा चाहिए बस इसको प्यार,ये कब किससे हारी है।
नजर उठा के देख जरा,हर कदम पर बाजी मारी है॥
दो घरों की शान बेटियां,इस बात पर इठलाती हूं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ,ये गीत प्रेम का गाती हूं॥
बेटी बचा और बेटी पढ़ा,तभी तो तू कहलाए इंसान।
गर्भ में इसको मार गिराए,माँ-बाप नहीं तू है हैवान।
इसको ना जो पढ़ने दिया,बन बैठा है क्यों तू शैतान।
हरकर के प्राण इसके तूने,बना लिया घर को शमशान॥
चारों तरफ देख ‘सुषमा’,अश्रु भी अविरल बहाती हूं।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’,ये गीत प्रेम का गाती हूं॥
#सुषमा मलिक
परिचय : सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१
तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास
रोहतक में ही शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित
सुषमा मलिक अपने कार्यक्षेत्र में विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल भी हैं।
सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है।
विविध अखबार और पत्रिकाओ में आपकी लेखनी आती रहती है। उत्तर प्रदेश की साहित्यिक संस्था ने सम्मान दिया है। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।