सैंकड़ों कुर्बानिंयों का
तोहफा देशभक्ति है,
इसमें बहता रक्त
किसी जाति मज़हब
का नहीं,
जज्बा-ए-जुनून का है।
नहीं थी किसी में लड़ाई
हिंदू-मुस्लिम की,
भूखा भगत था तो
रोटी बिस्मिल के गले
भी नहीं उतरी थी।
वंदे मातरम् इंकलाब का नारा
सबने एक स्वर में लगाया
था,
सरफरोशी की हर
दिल को तमन्ना थी।
तब कहीं जाकर
आजादी की अलख,
जगी थी
आहुति देशभक्तों की
तब आहुत हुई थी।
आज देशभक्तों की कौम
श्वेत वसन पर काली,
जैकेट डाल नारे लगाती है
दल की दलदल में धंसी,
बस मुख से देशभक्ति गाती है
महाभारत मचा दुशासन-सी,
आजादी का
चीरहरण करती है।
#डॉ. नीलम
परिचय: राजस्थान राज्य के उदयपुर में डॉ. नीलम रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। आपकी विधा-अतुकांत कविता, अकविता, आशुकाव्य आदि है।
आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना ही लिखने का उद्देश्य है।
Mon Jan 29 , 2018
कदम तेरे जरा भी काँपे नहीं, कैसे तुमने यह कदम उठाया। पापा के प्यार में क्या कमी थी, जो तुम बाबुल को छोड़ चली॥ माँ के विश्वास को तोड़कर, कैसे तुमने यह कदम उठाया। आशिक के प्यार की खातिर, माँ का आंचल ही छोड़ चली॥ कोई तेरी छोटी-सी खुशी के […]