महानायक

rajkumar shukl
(जंगे आजादी के महानायक सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन पर)
जय हिंद मेरे हिंद ही गाता रहा सदा,
माँ भारती पे जान लुटाता रहा सदा।
सेवा-ए-माँ का वादा जो किया कभी कहीं,
ता-उम्र अपना वादा निभाता रहा सदा।
दर-दर भटक-भटक के ढूँढे माँ के लाड़ले,
मर-मर के माँ की शान बचाता रहा सदा।
माँ कैद में थी कैसे सहता सच्चा लाल सो,
सारी उमर वो लोहा गलाता रहा सदा।
न पैर लड़खड़ाएं साथ चलने वालों के,
बढ़ने में ही है शान बताता रहा सदा।
थककर के चूर हो के भी कदम नहीं रुके,
हँस-हँस के हक एक जख्म भी खाता रहा सदा।
मिट्टी से बना राज वो मिट्टी में मिल गया,
पर बैरियों को धूल चटाता रहा सदा॥

#राज कुमार शुक्ल ‘राज’

परिचय: राज कुमार शुक्ल ‘राज’ की रचनाएं कई पत्रों और साहित्यक पत्रिका में गजल एवं कविता के रुप में छपी हैं। सम्मान के रुप में औरैया में न्यास द्वारा सर्वश्रेष्ठ गजलकार सम्मान २००० में तथा स्मृति संस्थान द्वारा २००१ सहित नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित शारदोत्सव प्रदर्शनी में प्रति वर्ष सम्मानित होते रहे हैं। अखिल भारतीय पुस्तक प्रचार समिति ने भी आपको २००७ में सम्मानित किया है। इसके अलावा मुक्तक मंथन सम्मान,प्रतिक्रिया श्री सम्मान,मुक्तक गौरव सम्मान,सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान तथा दीपशिखा सम्मान के साथ ही काव्य सागर सम्मान भी मिला है। आप सोशल मीडिया में सक्रिय होकर कई समूहों के संस्थापक संचालक हैं। श्री शुक्ल की जन्मतिथि-२५ जून और  जन्म स्थान -औरैया है। वर्तमान में औरैया में सत्तेश्वर मुहाल साहित्य भारती पुस्तकालय के पास (उत्तर प्रदेश) हैं। बी.ए. शिक्षित श्री शुक्ल का कार्यक्षत्र-सामाजिक क्षेत्र-औरैया ही है। लेखन विधा -ग़ज़ल और गीत है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी का सम्मान बढ़ाना है। 

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।