मयकदों का भरोसा नहीं,मयकशी का भरोसा नहीं,
आशिकों का भरोसा नहीं,आशिकी का भरोसा नहीं।
तपते सूरज से लो आग तुम,उसके जैसे जलो उम्रभर,
खुद से रौशन करो राह को,तीरगी का भरोसा नहीं।
उनकी मासूमियत पे न तुम,ऐसे इतराओ यूँ दोस्तों,
लूट लेती है चैन-ओ-सुकूँ,सादगी का भरोसा नहीं।
ले के दर-दर फिरेगी तुम्हें,चाहकर भी न मिट पाएगी,
कब बुझे कौन जाने यहाँ,तिश्नगी का भरोसा नहीं।
कब तलक रोज यूँ जीते रहें,मरते-मरते यहाँ दोस्तों,
मौत पर तो यकीं है हमें,जिंदगी का भरोसा नहीं॥
#आनंद कुमार पाठक
परिचय: आनंद कुमार पाठक का निवास शहर बरेली के शास्त्री नगर(इज़्ज़त नगर) में है। आपकी जन्मतिथि-४ फरवरी १९८८ तथा जन्म स्थान-बरेली(उत्तर प्रदेश)है। एम.बी.ए. सहित एम.ए.(अर्थशास्त्र) की शिक्षा ली है। नौकरी आपका कार्यक्षेत्र है। आपकॊ पढ़ाई में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक मिलना बड़ी उपलब्धि है। लेखन का उद्देश्य-साहित्य में विशेष रुचि होना है।