मरना होगा

0 0
Read Time1 Minute, 15 Second
sanjeev
कागतन्त्र है,
काँव-काँव
करना ही होगा
नहीं किया तो मरना होगा।
गिद्ध दिखाते आँख,
छीछड़े खा फ़ैलाते हैं।
गर्दभ पंचम सुर में,
राग भैरवी गाते हैं।
जय नेपाल पराजय,
कर प्रबंध झंडा फ़हराते हैं।
हुए निसार सहमत जो
उनको दिन-रात डराते हैं
नाग तंत्र के
दाँव-पेंच,
बचना ही होगा,
नहीं बचे तो मरना होगा।
इस सीमा से आतंकी
जब मन घुस आते हैं।
उस सरहद पर डटे
पड़ोसी सड़क बनाते हैं।
ब्रम्ह्पुत्र के निर्मल जल में
गंद मिलाते हैं।
ये हारें तो भी अपनी
सरकार बनाते हैं।
स्वार्थ तंत्र है
जन-गण को
जगना ही होगा,
नहीं जगे तो मरना होगा।
नए साल में नए तरीके
हम अपनाएँगे।
बाँटें-तोड़ें,बेच-खरीदें
सत्ता पाएँगे।
हुआ असहमत जो उसका
जीना मुश्किल कर दें
सौ बंदर मिल,घेर शेर को,
हम घुड़काएँगे।
फ़ूट मंत्र है
एकसाथ
मिलना ही होगा,
नहीं मिली तो मरना होगा॥
                 #संजीव वर्मा सलिल

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

वक़्त अच्छा हो जाए

Tue Jan 2 , 2018
  कोई औपचारिकता नहीं, इसलिए बने बनाए शब्दों का सहारा भी नहीं…। मैं नहीं चाहता कि, बरसों के घिसे-पिटे शुभकामनाओं के शब्दों को फ़िर से थोप दूं तुम पर, जैसा दुनिया करती आई है। मैं नहीं देता हूं तुम्हें… कोई बधाई या शुभकामनाएं, ‘इस अशुभ समय में’ अगर दूं तो […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।