उनमें ज्यादा ही
स्वाभिमान है,
किसी काम को
छोटा समझने
का गुमान है।
इस कशमकश
में खुद ही,
गुमनाम है
बेचारा ही बनने
का अभिमान है।
उद्यमशीलता,
उनका अपमान है।
गरीबी,दरिंदगी,
संत्रास को ओढ़े हुए
फ़टी हुई चादर
को समेटे हुए
बीवी की लटें
बिखरी हैं,
क्योंकि आड़े में,
स्वाभिमान है।
और उसका कुछ
अलग ही नाम है।
बड़े नादाँ हैं
पूर्णतः अनजान हैं,
इससे अनभिज्ञ कि,
उद्यमशीलता पाप नहीं
बल्कि एक छोटी,
उड़ान है।
अपने आशियाने
को,सजाने की
उलझी लटों को,
संवारने की,
क्योंकि उन्हीं के
कदमों में आसमान है।
जो हरदम, हरवक्त
चलायमान है,
सुबह से डटे हैं,
अपनी ही धुन
में रमे हैं।
उनमें भी स्वाभिमान है,
पर अनभिज्ञ नहीं,
न ही नादाँ हैं,उनमें
दर्प नहीं बल्कि,
सच्चा स्वाभिमान है॥
सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।
Fri Dec 22 , 2017
मुमकिन है मैं न आ पाऊं, पहनी है जो वर्दी खाकी। उदास न होना मेरी बहना, भिजवा देना डाक से राखी॥ तेरा गुस्सा जायज है पर, मैं भी तो मजबूर हूँ बहना। […]