सुख में कहाँ राम याद आते हैं

shashank sharma1
मुस्कुराता प्यारा बचपन
दिन प्यारे वह सुहाने,
मस्ती के सारे,सब काम याद आते हैं।
स्कूल की वो पढ़ाई
दोस्तों से हुई लड़ाई,
वो परीक्षा वो,परिणाम याद आते हैं।
वो अँधेरा मैं अकेला
डरता सहमा हुआ-सा,
भूतों के डर से,हनुमान याद आते हैं।
तरुणाई की प्यारी यादें
प्रियतम से फरियादें,
इश्क़ के वे सब,अंजाम याद आते हैं।
हम तो है धर्मनिरपेक्ष
संविधान मानते हैं,
अब क्यों हमें,चारों धाम याद आते हैं।
आ गया चुनावी मौसम
गिरगिट से हो गए हम,
अब हमें लो,भगवान याद आते हैं।
ये तो है पुरानी आदत
दुःख में याद करने की,
सुख में कहाँ हमें राम याद आते हैं॥

                                                                                                           #शशांक दुबे

परिचय : शशांक दुबे पेशे से उप अभियंता (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना), छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश में पदस्थ है| साथ ही विगत वर्षों से कविता लेखन में भी सक्रिय है |

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